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UP: ‘ममता पर भारी पड़ा रुपये-जेवर का लालच’, जंगल में बेटे ने दबा दिया मां का गला, उन्नाव में रिश्तों का कत्ल

Tue, 19 May 2026 08:48 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

Unnao Mother Murder Case: शीतलखेड़ा गांव में छोटे बेटे ने रुपये और चांदी के जेवर के लालच में अपनी वृद्ध मां की जंगल में गला दबाकर हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई हैं।
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मृतका की फाइल फोटो और पोस्टमार्टम हाउस में बैठे परिजन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उन्नाव जिले के नवाबगंज में जंगल में लकड़ी लेने गई वृद्ध महिला की रविवार को छोटे बेटे ने रुपये और जेवर के लालच में गला दबाकर हत्या कर दी। दूसरे दिन जंगल से शव बरामद होने के बाद वह घर से भाग गया। बड़े बेटे ने छोटे भाई के खिलाफ मां की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

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अजगैन कोतवाली क्षेत्र के शीतलखेड़ा गांव निवासी रामेशन ने पुलिस को बताया कि मां रामदुलारी (67) घर में अकेले रहती थीं। चार बेटों में रामकेशन, हरिश्चंद्र, राकेश और बिंदा प्रसाद हैं। सभी गांव में ही अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं। रविवार की दोपहर मां खाना बनाने के लिए लकड़ियां तोड़ने गांव के बाहर जंगल में गई थीं।





जंगल में पड़ा मिला मां का शव

उनके साथ भाई बिंदा प्रसाद भी गया था। बिंदा प्रसाद करीब एक घंटे बाद जंगल से अकेला घर आ गया। मां नहीं आईं। देर रात तक जब मां घर नहीं लौटीं, तो उनकी तलाश शुरू की गई। रातभर तलाश करने के बाद भी सुराग नहीं मिला। सोमवार सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में मां का शव पड़ा मिला।

शरीर पर चोट के निशान के साथ गले में भी निशान
मौके पर पहुंचे, तो देखा मां के शरीर पर चोट के निशान के साथ गले में भी निशान था। बिंदा प्रसाद शव मिलने के बाद से लापता है। घटना की सूचना पर पुलिस ने फील्ड यूनिट टीम के साथ जांच की और शव का पोस्टमार्टम कराया। उसमें गला दबाकर हत्या करने के साथ मारपीट के चोटों के निशान मिले हैं।

जेवर और रुपयों को लेकर हत्या
रामकेशन ने बताया कि आरोपी भाई बिंदा प्रसाद की शादी हो चुकी है। उसकी पत्नी संगीता, बेटा कृष्णा और बेटी जाह्नवी है। कोतवाल सुरेश सिंह ने बताया कि जेवर और रुपयों को लेकर हत्या करने की बात सामने आई है। मृतका के बेटे रामकेशन की तहरीर पर आरोपी बिंदा प्रसाद के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

चार बेटे होने के बाद भी दुश्वारियों भरा जीवन जी रही थीं रामदुलारी
चार बेटे होने के बाद भी रामदुलारी अकेली रहती थीं। पड़ोस में ही चारों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ रहते हैं लेकिन वृद्ध मां को कोई भी खाना नहीं देता था। वह खुद ही खाना बनाकर खाती थीं। बेटे रामकेशन के मुताबिक मां के पास बहुत कुछ नहीं था।
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बच्चों और बहुओं की बातें न सुननी पड़ें
चांदी के कुछ जेवर और बमुश्किल दो से चार हजार रुपये होंगे। बच्चों और बहुओं की बातें न सुननी पड़ें। इस कारण वह खुद अपना सब काम करती थीं। उसके बाद भी बेटे बिंदा प्रसाद ने उन्हें नहीं छोड़ा। खुद कमाने के बजाय मां के पास जो था उसे हड़पने के लिए मां को मौत के घाट उतार दिया।
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