पिता आशीष शुक्ला, मां और भाई ऋषभ के साथ छात्रा रिद्धिमा
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अपनी मेहनत पर जितना विश्वास उन्नाव की छात्रा रिद्धिमा को था। उससे कहीं ज्यादा परिवार को उसकी योग्यता पर। बेटी ने अपने हक की लड़ाई लड़ने की ठानी तो पिता सहित पूरा परिवार उसके साथ हो गया। अफसरों से शिकायतें कीं। सूचना के अधिकार का भी सहारा लिया लेकिन बात नहीं बनी।
न्यायालय की शरण ली तो मेधावी रिद्धिमा को उसकी मेहनत का फल मिला। परीक्षाफल में 9 अंक जुड़ने से प्रदेश में संयुक्त रूप से सातवां स्थान हासिल हुआ। अब लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को दंड भी मिला है। न्यायालय ने कॉपी जांचने वाले पांच शिक्षकों पर बीस-बीस हजार जुर्माना लगाते हुए रकम छात्रा को देने का आदेश दिया है। जीत पर छात्रा उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
त्रिवेणी काशी इंटर कॉलेज बिहार की छात्रा रिद्धिमा शुक्ला ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल परीक्षा दी थी। मेहनत के अनुसार उसे विश्वास था कि उसका नाम प्रदेश की मेरिट में जरूर आएगा। रिजल्ट आया तो छात्रा को 554 अंक मिले। संस्कृत व सामाजिक विषय में अंक कम मिले थे। रिजल्ट आने के बाद रिद्धिमा का विश्वास तो डगमगाया लेकिन हार नहीं मानी।