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शातिर अपराधियों का ठिकाना बना यूपी का ये शहर, नहीं होता किरायेदारों और फैक्टरी मजदूरों का सत्यापन

Tue, 02 Mar 2021 11:50 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव जिला - फोटो : अमर उजाला
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दूसरे प्रांतों और जिलों के अपराधियों और आतंकी गतिविधियों के लिए उन्नाव शहर और औद्योगिक क्षेत्र का इलाका पनागाह साबित हो रहा है। कई बार शातिर अपराधी और आतंकी संगठनों से जुड़े कई शातिर गिरफ्तार होने के बाद भी पुलिस ने फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों और किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराया। अपराधी गैर जिलों में वारदातों को अंजाम देने के बाद यहां ठिकाना बनाते हैं और अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं। 
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कई बार सुर्खियों में आया उन्नाव
केस-एक

कानपुर व महाराष्ट्र पुलिस ने 12 जनवरी 2019 में शहर के ककरहा बाग मोहल्ले में रात एक घर में छापा मारकर तीन महिलाओं सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से भारी मात्रा संदिग्ध सामग्री और करेंसी बरामद की थी। यह पांचों लोग पिछले तीन महीने से यहां पांच हजार रुपये प्रति माह किराये पर मकान लेकर रह रहे थे।

केस-दो
शिवनगर से पकड़े थे शातिर चोर 

छह जनवरी 2019 को शिवनगर से पुलिस ने कुछ चोरों को गिरफ्तार किया था। कानपुर से चोरी की घटना के बाद चोर शिवनगर में किराये के मकान में रहने के लिए आए थे। पूछताछ में उन्होंने चोरी की घटनाएं व चोरी के माल के बंटवारे में विवाद की बात कबूल की थी।
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सुरक्षित ठिकाना मानते हैं अपराधी
राजधानी लखनऊ और महानगर कानपुर के बीच बसे उन्नाव को अपराधी छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। मार्च 2017 में भोपाल में ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में आतंकी सैफुल्ला को एनकाउंटर में मार गिराया था। एनआईए के हत्थे चढ़े कानपुर के गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर टीम 28 मार्च 2017 को शहर आई थी। जांच में पता चला कि आतंकी सैफुल्ला और उसके साथी शहर की दरगाहों में जायरीन बनकर कई-कई दिन रुकते थे। इनमें रेलवे स्टेशन के पास स्थित बुद्धशाह और किला मोहल्ला स्थित मस्जिद उनकी सबसे पसंदीदा थी।

पहले भी कई बार पकड़े गए 
- फरवरी 2018 में स्लाटर हाउस में काम कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को एटीएस ने पकड़ा था।
- 20 अप्रैल 2017 पंजाब में गिरफ्तार आतंकी जीशान उर्फ गाजी बाबा आसीवन के रसूलाबाद का मूल निवासी था।
- 7 मार्च 2017 को लखनऊ में एटीएस के एनकाउंटर में मारा गया आतंकी सैफुल्ला साथियों के साथ स्टेशन रोड व किला स्थित मस्जिद में जरायीन के रूप में महीनों रुका था।
- 2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
- फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में टीचर बनकर रह रहे बशीर हसन को गिरफ्तार किया था।
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