फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उन्नाव: बांगरमऊ में 3 साल में 4 हजार की जांच, 82 एचआईवी संक्रमित, एक ही सिरिंज के प्रयोग से फैला था एचआईवी

Mon, 07 Dec 2020 04:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
एचआईवी एड्स - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन
उन्नाव के बांगरमऊ में संक्रमित सिरिंज से बड़े पैमाने पर एचआईवी फैलने के बाद संक्रमण की जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तीन साल में बांगरमऊ में चार हजार सेे अधिक लोगों ने जांच कराई है। इनमें 82 लोग एचआईवी संक्रमित मिले हैं। इनमें 2017-2018 में मिले 74 संक्रमित भी शामिल हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है।
विज्ञापन


बांगरमऊ में वर्ष 2016-2017 में एचआईवी के 25 मामले सामने आए थे। 2017 की शुरुआत में भी जब संक्रमितों की संख्या बढ़ी तो स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया था। बांगरमऊ कसबा के मोहल्ला प्रेमनगर व पास के गांव करीमुद्दीनपुर व चकमीरपुर गांव में कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई थी। वर्ष 2017 में 458 लोगों ने जांच कराई थी। जिसमें 12 लोग संक्रमित पाए गए थे।

इसके बाद विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया तो 40 से अधिक लोग संक्रमित मिले थे। बांगरमऊ कसबे व उसके आसपास के क्षेत्र में दो साल में ही 60 से अधिक केस सामने आने के बाद क्षेत्र को रेड जोन  घोषित कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एचआईवी का ग्राफ बढ़ने पर जांच कराने वालों की संख्या भी बढ़ी। 2017 के बाद से अब तक चार हजार से अधिक लोगों ने जांच कराई। तीन साल में बांगरमऊ व उसके आसपास क्षेत्र में 82 लोगों में एचआईवी का संक्रमण पाया गया। इसमें वर्ष 2016, 2017 में सबसे अधिक केस सामने आए थे।
विज्ञापन


 

जिले में एचआईवी संक्रमितों पर एक नजर
2020 में अब तक 34
2019 में 79
2018 में 96
2017 में 70

नहीं खुला आईसीटीसी
बांगरमऊ में वर्ष 2017-2018 में बड़े पैमाने पर एचआईवी केस सामने आने के बाद बांगरमऊ देश भर में सुर्खियों में आया था। मामले की पड़ताल करने के लिए नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाईजेशन) और यूपीसेक (यूपी एड्स कंट्रोल सोसायटी) की संयुक्त टीम ने बांगरमऊ  क्षेत्र का दौरा किया था।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने बांगरमऊ में आईसीटीसी (एकीकृत परामर्श व परीक्षण केंद्र) खोलने की घोषणा की थी। लेकिन यह घोषणा अबतक हकीकत नहीं बन पाई। इससे बांगरमऊ क्षेत्र के लोगों को जांच के लिए जिला अस्पताल या हसनगंज स्वास्थ्य केंद्र की दौड़ लगानी पड़ती है। टीम ने जिला अस्पताल में एआरटी (एंटीरेट्रो वायरल थेरेपी) सेंटर की भी जरूरत बताई थी। लेकिन यह काम अबतक नहीं हो पाया।  

 

ऐसे सामने आया मामला
वर्ष 2017 में बांगरमऊ के प्रेमगंज मोहल्ला निवासी कुछ लोगों में कमजोरी, बुखार व लगातार वजन कम होने पर जांच कराई। उनमें एचआईवी के लक्षण वाले 13 (रिएक्टिव केस) लोगों की पहचान हुई। इसपर 24 नवंबर 2017 को स्वास्थ्य विभाग ने सभी की कानपुर से जांच कराई तो इन 13 में से 12 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई।

एक साथ समूह में एचआईवी संक्रमित मिलने पर विभाग सक्रिय हुआ और दिसंबर 2017 में एचआईवी जांच के लिए कैंप लगाए। प्रेमगंज मोहल्ला के अलावा पास के गांव करीमुद्दीनपुर, चकमीरपुर सहित अन्य बस्तियों में रहने वाले लोगों की जांच के लिए एक महीने तक कैंप आयोजित किए गए। डेढ़ महीने में एचआईवी संक्रमितों की संख्या 74 पहुंच गई थी। इसपर स्वास्थ्य विभाग में  हड़कंप मचा और वृहद स्तर पर जांच शुरू हुई।

लाइलाज बीमारी देने वाला आरोपी जमानत पर
सदी, जुकाम, बुखार, दस्त से लेकर हर बीमारी का बीस रुपये में इलाज करने वाले व बांगरमऊ क्षेत्र में एचआईवी संक्रमण के फैलाव का मुख्य आरोपी ठहराया गया झोलाछाप राजेश को पुलिस ने प्रति दिन दर्जनों लोगों के इलाज में एक ही सिरिंज व सुई का प्रयोग करने के आरोप में फरवरी 2018 में रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा था। जेल जाने के 52 दिन बाद ही उसे न्यायालय से जमानत मिल गई।

मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि झोलाछाप का कहना है उसे फंसाया गया है। बताया कि बांगरमऊ कस्बा में उसके आगे किसी की प्रैक्टिस नहीं चल पा रही थी। वह सिर्फ बीस रुपये में लोगों का इलाज करता था। इसी के चलते सभी प्राइवेट डॉक्टरों ने मिलकर उसके खिलाफ साजिश रची और झूठे आरोप में फंसा दिया गया।

बताया कि उसके पास डिग्री नहीं है। लेकिन उसे रोगों की पहचान और इलाज की पूरी जानकारी है। उससे इलाज कराने वाला कोई भी व्यक्ति उसे गलत नही मानता, उसपर किसी ने आरोप भी नहीं लगाया है। हालांकि उसने अब लोगों का इलाज करना बंद कर दिया है। उसके पास 25 बीघा जमीन है वह सिर्फ खेती कर रहा है।

 
विज्ञापन

इलाज की राह में बाधा बनी गरीबी
बांगरमऊ क्षेत्र में एचआईवी संक्रमित लोगों में अधिकांश गरीब परिवार से हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमितों को एंबुलेंस से कानपुर एआरटी सेंटर भेजकर इलाज कराने की सुविधा दी थी। लेकिन समय के साथ यह सुविधा बंद हो गई। गरीबी के कारण लोग कानपुर नहीं जा पाते हैं।

एआरटी के लिए नहीं मिले डॉक्टर व टेक्नीशियन
प्रभारी सीएमओ डॉ. तन्मय कक्कड़ ने बताया कि आईसीएमआर के शोध में सामने आया है कि बांगरमऊ क्षेत्र में भारी संख्या में लोगों में एचआईवी संक्रमण के पीछे एक ही सिरिंज व सुई से कई लोगों को इंजेक्शन लगाने से संक्रमण एक दूसरे में फैला है। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक किया गया है। इससे अब संक्रमितों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में एआरटी (एंटीरेट्रो वायरल थेरेपी) सेंटर को मंजूरी मिल गई है। दो स्टाफ नर्स की तैनाती हो गई है लेकिन डॉक्टर व टेक्नीशियन की तैनाती न होने से अभी संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इससे लोगों को थेरेपी के लिए कानपुर जाना पड़ रहा है। बताया कि अगले 2-3 महीने में सेंटर चालू हो जाएगा।

अमर उजाला ने ब्रेक की थी खबर, किया था जागरूक
बांगरमऊ तहसील के प्रेमगंज व आसपास के गांव में एचआईवी के मरीज बढ़ने की खबर सबसे पहले 2017 में अमर उजाला ने ब्रेक की थी। मामला राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचा। स्वास्थ्य महकमा जागा और जांच, जागरूकता अभियान के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया। कवरेज में अमर उजाला ने लोगों की मुश्किलें, मन ही मन में एचआईवी की आशंका में घुट रहे लोगों की व्यथा को सामने लाकर उनमें बीमारी से लड़ने का जज्बा भी जगाया। इसी का नतीजा रहा कि लोग सामने आने लगे और संकोच व डर को छोड़ अपनी जांच और इलाज कराने लगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें