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अनोखा केस: मुकदमे में फूंक दिए 1.31 लाख, जुर्माने के 15 हजार न वसूल पाई सरकार

Fri, 02 Jul 2021 03:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर

सार

फर्म ने वर्ष 2003 में सीआरपीएफ को फोल्डिंग चम्मच (खाना परोसने वाले बड़े चम्मच) की आपूर्ति की थी। आपूर्ति में देरी पर फर्म पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कानपुर में बर्तनों की आपूर्ति करने वाली फर्म से 15 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने के लिए मुकदमेबाजी में सवा लाख से अधिक खर्च करने के बाद भी केंद्र सरकार को एक धेला न मिला। दस साल से चल रहे मुकदमे में फर्म को कोर्ट का नोटिस तक नहीं तामील कराया जा सका। अब मामला खुलने पर सरकार की ओर से जिला जज की कोर्ट में मुकदमा वापस लेने की अर्जी लगाई गई है।
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सुनवाई सात जुलाई को होगी। धनकुट्टी स्थित फर्म मेसर्स विश्वा ट्रेडर्स का वर्ष 2002-03 में सीआरपीएफ के साथ सामान आपूर्ति का ठेका था। फर्म ने वर्ष 2003 में सीआरपीएफ को फोल्डिंग चम्मच (खाना परोसने वाले बड़े चम्मच) की आपूर्ति की थी। आपूर्ति में देरी पर फर्म पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

मध्यस्थता केंद्र (आर्बीट्रेशन) के आदेश के बाद ब्याज सहित कुल 15,491 रुपये की वसूली के लिए जिला जज की अदालत में वर्ष-2011 में इजरा वाद दाखिल किया गया। अदालत ने फर्म को नोटिस जारी किया, लेकिन सही पता न होने के आधार पर तामील नहीं किया जा सका।
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कुर्की परवाना भी जारी नहीं हुआ। इसके बाद भी सरकार की ओर से पूर्व में नियुक्त अधिवक्ता को लगातार पैरवी के लिए फीस और खर्च के नाम पर दस साल में कुल एक लाख 31 हजार 585 रुपये भुगतान किए जा चुके हैं। मूलधन की वसूली के लिए लगभग दस गुना खर्च करने के बाद भी सरकार के हाथ में एक रुपया नहीं आया।

फाइल की जांच के बाद सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट लॉ अरविंद यादव ने सरकार के स्थायी शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा को पत्र भेजकर मुकदमा वापस लेने के निर्देश दिए। इस पर जिला जज की अदालत में मुकदमा वापसी के लिए अर्जी दे दी गई है।

लचर पैरवी और कुछ अफसराें की लापरवाही से मुकदमा दस साल से लंबित है। विपक्षी फर्म वर्तमान में भी कार्यरत है और कई सरकारी ठेकों में सामान की आपूर्ति कर रही है। फर्म के सही पते की जानकारी करना मुश्किल नहीं था। वसूली के लिए कुर्की की कार्रवाई भी नहीं हो सकी। इतने नुकसान के बाद अब मुकदमे को आगे चलाने का कोई फायदा नहीं था, इसलिए मुकदमा वापसी का फैसला लिया गया।
कौशल किशोर शर्मा, स्थायी शासकीय अधिवक्ता, केंद्र सरकार

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