कुर्की परवाना भी जारी नहीं हुआ। इसके बाद भी सरकार की ओर से पूर्व में नियुक्त अधिवक्ता को लगातार पैरवी के लिए फीस और खर्च के नाम पर दस साल में कुल एक लाख 31 हजार 585 रुपये भुगतान किए जा चुके हैं। मूलधन की वसूली के लिए लगभग दस गुना खर्च करने के बाद भी सरकार के हाथ में एक रुपया नहीं आया।
फाइल की जांच के बाद सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट लॉ अरविंद यादव ने सरकार के स्थायी शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा को पत्र भेजकर मुकदमा वापस लेने के निर्देश दिए। इस पर जिला जज की अदालत में मुकदमा वापसी के लिए अर्जी दे दी गई है।
लचर पैरवी और कुछ अफसराें की लापरवाही से मुकदमा दस साल से लंबित है। विपक्षी फर्म वर्तमान में भी कार्यरत है और कई सरकारी ठेकों में सामान की आपूर्ति कर रही है। फर्म के सही पते की जानकारी करना मुश्किल नहीं था। वसूली के लिए कुर्की की कार्रवाई भी नहीं हो सकी। इतने नुकसान के बाद अब मुकदमे को आगे चलाने का कोई फायदा नहीं था, इसलिए मुकदमा वापसी का फैसला लिया गया।
कौशल किशोर शर्मा, स्थायी शासकीय अधिवक्ता, केंद्र सरकार