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अंडरगारमेंट इंडस्ट्री को ऐसे लगा ‘डिस्क ब्रेक’

Thu, 15 Dec 2016 12:53 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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सूबे की अंडरगारमेंट इंडस्ट्री ठप
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रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरत को पूरा करने के क्रम में जब कपड़ों की बारी आती है तो सबसे पहली जरूरी होते हैं अंडरगारमेंट लेकिन नोटबंदी ने यूपी की इस इंडस्ट्री को चौपट कर दिया है।  देश के तीसरे सबसे बड़े अंडरगारमेंट निर्माता शहर कानपुर में 70 फीसदी उत्पादन ठप है। यूनिटें बंद हैं और कामगार घरों में बैठ चुके हैं। वजह साफ है डिमांड नहीं तो उत्पादन किसके लिए।
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होजरी उद्यमी बताते हैं कि एक बनियान बनाने में 27 कामगारों के हाथ लगते हैं। इस इंडस्ट्री में बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार मिलता है। शहर में ही अंडरगारमेंट मैन्युफैक्चरिंग की  500 से ज्यादा यूनिटें हैं। इनमें 60 हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। उत्तर प्रदेश में अंडरगरमेंट की कुल खपत का 20 फीसदी उत्पादन कानपुर में ही होता है। बीते एक माह से इन यूनिटों को नए ऑर्डर नहीं मिले हैं। इस वजह से 70 फीसदी से ज्यादा यूनिटों में उत्पादन बंद है। पहले से जमा स्टॉक उधारी में या फिर पुरानी करेंसी के बदले निकाला गया। नई करेंसी में 50 हजार रुपये निकालने की लिमिट की वजह से उद्यमी न तो कच्चा माल खरीद पा रहे हैं न ही कामगारों को नकद भुगतान कर पा रहे हैं। इस वजह से थोड़ी बहुत डिमांड भी पूरी नहीं हो पा रही है। एमडी जेट अंडरवियर बलराम नरूला ने बताया कि कारोबार पर नोटबंदी का व्यापक असर है। हालांकि उद्योग इससे निकलने के तरीके ईजाद कर रहे हैं। जैसे विनाश के बाद सृजन शुरू होता है, उसी तरह उद्योग भी धीरे-धीरे ही पनपेंगे। पहले जैसी स्थिति तो नहीं रहेगी। यूपी में अंडरगारमेंट इंडस्ट्री पहले भी सरकारों की उपेक्षा का शिकार थी। अब नोटबंदी ने इसे और चौपट कर दिया। इससे उबरने में कम से कम साल भर लगेंगे।
हजारों घरों में होता है जॉब वर्क
अंडरगारमेंट इंडस्ट्री में कई स्तर पर प्रोसेसिंग का काम होता है। बड़ी संख्या में लोग कटिंग, स्टिचिंग, फिनिशिंग, पैकिंग, पैकेजिंग आदि काम घरों में बैठकर जॉब वर्क के तौर पर करते हैं। शहर के 10 हजार से ज्यादा परिवार इसी काम से परिवार चला रहे हैं। नोटबंदी के बाद से इन्हें काम मिलना बंद है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा डिमांड
कानपुर का अंडरगारमेंट उद्योग 70 फीसदी तक ग्रामीण एरिया पर निर्भर है। गांवों में शहर की अपेक्षा करेंसी की किल्लत ज्यादा है। इस वजह से भी यह उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित है। सर्दी में फुल इनर वियर की डिमांड बढ़ती है लेकिन इस बार पिछली डिमांड की 10 फीसदी भी नहीं रह गई।
ऊलेन होजरी से अलग है यह उद्योग
अंडरगारमेंट होजरी उद्योग में आता है लेकिन यह लुधियाना के ऊलेन होजरी उद्योग से भिन्न है। ऊलेन होजरी में लुधियाना देश में नंबर वन है, जबकि अंडरगारमेंट होजरी उद्योग में लुधियाना टॉप थ्री में भी नहीं है। अंडर गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग में तमिलनाडु का तिरुपुर शहर पहले स्थान पर है। कोलकाता दूसरे और कानपुर तीसरे स्थान पर है।
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तीन शहरों की है धाक
- तिरुपुर (तमिलनाडु), कोलकाता (प. बंगाल), कानपुर (उ.प्र.)
शहर की अंडरगारमेंट इंडस्ट्री पर एक नजर
700 करोड़ का सालाना टर्नओवर है कानपुर में
500 से ज्यादा यूनिटें हैं शहर में
60,000 लोग जुड़े हैं इस इंडस्ट्री से 
70 फीसदी कारोबार हो चुका है ठप
25,000 से ज्यादा लोग बैठ चुके हैं घरों में
27 लोगों के हाथ लगते हैं एक बनियान बनाने में


 
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