उलेमा ने तीन तलाक बिल को शरीयत में हस्तक्षेप बताया है। कहा कि संविधान ने सभी को धार्मिक कानून मानने का अधिकार दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंंद को जिलाधिकारी के जरिए भेजे गए ज्ञापन में भीड़ हिंसा को रोकने और शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी की फिल्म आयशा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
शहर काजी मौलाना आलम रजा खां नूरी की अगुवाई में उलेमा का प्रतिनिधिमंडल एडीएम से मिला और उन्हें राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उलेमा ने ज्ञापन में कहा कि तीन तलाक को खत्म कर देना मजहबी आजादी को नुकसान पहुंचाना है।
इसके साथ ही कश्मीर में शांति बहाली की राष्ट्रपति से मांग की गई। संविधान में दिए गए अधिकारों के मुताबिक शरीयत की हिफाजत की मांग की गई। इसके साथ ही शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
उलेमा ने कहा कि पैगबंर-ए-इस्लाम की पत्नी पर फिल्म बनाकर रिजवी ने मुसलमानों की आस्था को आहत किया है। प्रतिनिधि मंडल में मुफ्ती अल्फासुल हसन चिश्ती, मुफ्ती हसीब अख्तर शहीदी, महबूब आलम खान, इखलाक अहमद डेविड, मुफ्ती आफताब चिश्ती आदि मौजूद थे।