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नैक में कटेगी ‘नाक’

Fri, 13 Mar 2015 03:15 AM IST
संतोष सिंह कानपुर
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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के निरीक्षण में छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी की नाक कटनी तय है क्योंकि शिक्षकों की नियुक्ति, वेतनमान और शैक्षिक अर्हता के मानक पर यूनिवर्सिटी खरी नहीं है। सेल्फ फाइनेंस कोर्स में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है।
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सेलेक्शन कमेटी से नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों को भी फिक्स वेतनमान दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को प्राइमरी शिक्षक से कम वेतन मिल रहा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन सांसत में है क्योंकि पिछली बार की ग्रेडिंग टीम ने यूनिवर्सिटी को टूरिस्ट प्लेस करार दिया था। कहा था कि यहां एजूकेशन का माहौल ही ठीक नहीं है।

यूनिवर्सिटी की नैक ग्रेडिंग के लिए 22 मार्च को नैक की टीम आ रही है। यह टीम 23, 24, 25 और 26 मार्च को विभिन्न विभागों में जाएगी। वहां की लैब, लाइब्रेरी और उसके सुविधा-संसाधन का अध्ययन करेगी। देखेगी कि टीचिंग, नान टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति हुई है या नहीं। टीचर्स की क्वालीफिकेशन क्या है।
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उन्हें कौन सा वेतनमान दिया जा रहा है। यही सवाल यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए मुसीबत बन गए हैं। यूनिवर्सिटी कैंपस में जितने भी सेल्फ फाइनेंस कोर्स चल रहे हैं, उनमें से एक में भी प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं है। एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) और असिस्टेंट प्रोफेसर की संख्या भी बेहद कम है।

यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में शिक्षकों की अर्हता ठीक नहीं है। बीटेक डिग्रीधारी ही बीटेक स्टूडेंट को पढ़ा रहे हैं। एमटेक और ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) क्वालीफाई करने वाले शिक्षकों की संख्या कम है। कुछ शिक्षकों ने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से एमटेक कर रखा है, जो कि मान्य नहीं है। एमसीए के स्टूडेंट्स को सामान्य डिग्रीधारी पढ़ा रहे हैं, जबकि पीएचडी और नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) क्वालीफाई करना जरूरी है।

फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई गेस्ट फैकल्टी के सहारे कराई जा रही है। हेल्थ साइंसेस, बीएसबीटी, बीबीए, बीसीए और फार्मेसी में भी शिक्षकों की संख्या कम है। किसी भी शिक्षक को यूजीसी का निर्धारित छठवां वेतनमान नहीं मिल रहा है। 20 सालों से स्केल पर काम करने वाले शिक्षकों को भी चौथा और पांचवां वेतनमान मिल रहा है।

फिक्स वेतन पाने वाले शिक्षकों की संख्या अच्छी खासी है। फिक्स वेतन वाले शिक्षक पीएचडी नहीं करा पा रहे हैं। यूजीसी का रिसर्च प्रोजेक्ट भी नहीं मिल रहा है। यही नहीं अनुदानित कोर्स के शिक्षकों की हालत भी ठीक नहीं है। तमाम शिक्षक ऐसे हैं, जिनका प्रमोशन 8 साल से लंबित है। इसके बावजूद प्रमोशन प्रक्रिया नहीं शुरू हो पा रही है। इससे अनुदानित कोर्स के शिक्षक भी नाराज हैं।

नैक ग्रेडिंग को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हर डिपार्टमेंट से पांच-पांच मिनट का पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन मांगा है, जिसमें ज्यादातर विभाग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। विभाग के शिक्षकों का कहना है कि सेलेक्शन कमेटी से नियुक्ति के बाद भी फिक्स वेतनमान देना ठीक नहीं है।

प्रमोशन की कोई व्यवस्था नहीं है। जिस शिक्षक की नियुक्ति जिस पद पर हुई थी, वह उसी पद पर बना हुआ है। यूनिवर्सिटी प्रशासन किसी भी मांग पर अमल नहीं कर रही है। इस बार नैक टीम से ही विरोध दर्ज कराया जाएगा।

सीएसजेएम यूनिवर्सिटी कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने कहा कि गुरुवार को छह विभागों का पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन देखा है। कई विभागों में जाकर व्यवस्था भी देखी है। जितना अच्छा ग्रेड मिलेगा, शिक्षकों का भविष्य उतना ही अच्छा होगा। ग्रेड खराब होने का फायदा शिक्षकों को नहीं मिलेगा।

शिक्षकों के वेतनमान में 50 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गई है। जल्द ही और वेतन बढ़ोत्तरी की जाएगी। शिक्षकों की समस्याओं का अध्ययन कर लिया गया है। इनका समाधान जल्द कराया जाएगा। यूनिवर्सिटी को अच्छा ग्रेड मिले, यह कुलपति, शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंट्स की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस मौके पर किसी तरह का विरोध करना ठीक नहीं है।
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