यूसीसी बैंक का लाइसेंस खारिज होने के बाद अब नियमानुसार एक ऑफिशियल लिक्विडेटर की तैनाती की जाएगी। लिक्विडेटर बैंक की संपत्ति और लाइबिलिटी यानी देनदारी की गणना करेगा।
इसके आधार पर सभी ग्राहकों के पैसे की देनदारी का अनुपात तय होगा। जानकारों के मुताबिक यूसीसी बैंक के ज्यादातर एसेट्स डूब चुके हैं, इसलिए ग्राहकों को बीस फीसदी से ज्यादा धन वापस नहीं मिल सकेगा।
उधर आरबीआई द्वारा कराए जाने वाले बीमे से एक लाख रुपए तक की रकम वापस हो जाएगी। यूसीसी बैंक पर ग्राहकों की करीब 60 करोड़ की लाइबिलिटी है। बड़े-बड़े घपले होने के चलते ज्यादातर रकम डूब चुकी है।
बैंक में लोन के तमाम घपले हुए हैं, जिनमें 32 करोड़ से ज्यादा के मामले बीते माह हुई एफआईआर में स्पष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे मकानों पर होम लोन दिए जाने के प्रकरण भी हैं, जहां मकान हैं ही नहीं।
इसके अलावा फर्जी लोगों को करोड़ों की रकम लोन कर दी गई है, जिनका कुछ अतापता नहीं है। तमाम लोगों से मिलीभगत करके उन्हें लोन के मुकाबले औनी-पौनी रकम लेकर नो-ड्यूज सर्टिफिकेट दे दिए गए।
खास बात यह है कि यह पैसा बैंक में जमा करने के बजाए प्रबंधन के लोगों ने अपनी जेब में रख लिया। आरबीआई द्वारा बीमा कराए जाने के चलते एक लाख तक की रकम जमा करने वालों को पूरा पैसा मिलेगा।
उदाहरण के लिए यदि किसी ने बैंक में चार लाख जमा किए हैं, तो एक लाख बीमे का और बाकी के तीन लाख एक निश्चित अनुपात में ग्राहक को लौटाए जाएंगे। हालांकि इस प्रक्रिया को पूरा होने में बरसों लग जाते हैं।
फेडरल कोऑपरेटिव बैंक इसी तरह दस वर्ष पूर्व बंद हुआ था, जिसके ग्राहकों को आज तक रकम नहीं मिली।