फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो पाकिस्तानी जासूसों को सात साल कैद, कुछ इस तरह के कोड वर्ड में होती थी बात

Sun, 19 Nov 2017 01:15 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
एसटीएफ और अनवरगंज पुलिस ने 2002 में संयुक्त रूप से छापा मारकर अनवरगंज क्षेत्र से बांसमंडी के जीशान अली और फतेहपुर के नाजिम अली को गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत हुई थी।
विज्ञापन



बांसमंडी के जीशान अली और फतेहपुर के नाजिम अली पर सेना की गुप्त सूचनाएं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को देने का आरोप था। एडीजे 12 रवींद्र कुमार द्वितीय की कोर्ट ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के दो एजेंटों को सात साल कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में 15 साल बाद फैसला आया है।



पुलिस ने दोनों के कब्जे से छावनी का नक्शा, सैन्य ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए थे। सैन्य संस्थान सीओडी, आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री (ओईएफ) और एचएएल के फोन नंबर भी मिले थे। पाकिस्तान के माध्यम से इन्हें दुबई से फंडिग करने का भी खुलासा हुआ था। इनके खाते में 45 हजार रुपये मिले थे।
विज्ञापन



यह मामला एडीजे 12 की कोर्ट में चल रहा था। सहायक शासकीय अधिवक्ता मनोज बाजपेई ने बताया कि गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को सजा सुनाई। कोर्ट में तत्कालीन अनवरगंज थानाध्यक्ष नरेंद्र पाल सिंह, तत्कालीन एसटीएफ प्रभारी कमल यादव समेत आठ लोगों ने गवाही दी थी। सेना के अफसर अरविंद चौहान और आरके सिंह ने कोर्ट में कोड वर्ड की और अन्य दस्तावेज से जुड़ी जानकारी की पुष्टि की थी।


कोड वर्ड में करते थे बात 
कोर्ट में बताया गया था कि दोनों एजेंट कोड वर्ड में बात करते थे। सेना की शिफ्ट बदलने को कोड वर्ड में शादी हो रही है कहते थे और संदेश को सैंपल कहते थे। यूनिट के लिए बल्ली शब्द प्रयोग किया जाता था। दोनों सूचना देते समय इलाहाबाद छावनी को रेड ईगल, लखनऊ छावनी को सूरज कहते थे। तोप को सिगरेट कहते थे।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें