भीतरगांव (घाटमपुर)। क्षेत्र के हस्कर गांव में डेंगू से छह मौतों के बाद अब लाखनखेड़ा गांव में 12 घंटे के भीतर छात्रा समेत दो लोगों की मौत हो गई। लाखनखेड़ा में अभी भी बुखार से पीड़ित कई लोग अपना इलाज विभिन्न अस्पतालों में करा रहे हैं। दो मौतों से अब ग्रामीणों में दहशत है।
कक्षा 11 की छात्रा लाखनखेड़ा गांव निवासी सुरुचि (16) पुत्री सुनील कुमार एक सप्ताह से बुखार की चपेट में थी। जांच के दौरान डाक्टरों ने डेंगू की पुष्टि की थी, इसके बाद से उसका इलाज कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। परिजन बुधवार को इलाज के बाद हालत में सुधार के चलते सुरुचि को गांव ले आए थे। रात में अचानक हालत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। उधर, गांव के ही योगेंद्र उर्फ सोनू पाल (28) भी चार-पांच दिन से बुखार से पीड़ित थे। तब उन्होंने जांच कराई तब डेंगू की पुष्टि हुई तो परिजन तीन दिन से योगेंद्र का इलाज कानपुर के निजी अस्पताल में करा रहे थे।
गुरुवार सुबह कानपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। गांव में 12 घंटे के अंतराल में दो मौतों से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के डेंगू पीड़ित 25 से अधिक लोग अपना इलाज विभिन्न अस्पतालों में करा रहे हैं। ग्रामीणों में अभी तक स्वास्थ्य टीम के गांव नहीं आने से आक्रोश हैं। भीतरगांव के चिकित्साधीक्षक डा. अजय मौर्या को लाखनखेड़ा गांव में हुई डेंगू से दो मौतों की जानकारी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हस्कर गांव में डेंगू से मौत पर स्वास्थ्य टीम पहुंची और लोगों का परीक्षण कर दवाएं दीं। इसके पहले भी दो बार और स्वास्थ्य शिविर हस्कर गांव में लगाया जा चुका है।