ब्रेन स्ट्रोक से सोमवार को दो वृद्ध लोगों की हैलट की चौखट पर मौत हो गई। एक को बिंदकी से तो दूसरे को जालौन से लेकर उनके परिजन हैलट पहुंचे थे।
दोनों ही मामलों में डाक्टरों का कहना है कि इलाज शुरू करने से पूर्व ही दोनों की मौत हो चुकी थी। ब्रेन स्ट्रोक की वजह अधिक ठंड बताई जा रही है।
हैलट के न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता का कहना है कि ठंड में दिमाग की नसें सिकुड़ने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिमाग की नसें फट जाती हैं। इससे व्यक्ति की मौत हो जाती है या फिर उसके बेहोशी जाने की संभावना रहती है।
परिजनों के मुताबिक बिंदकी निवासी रामबिलास (65) सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। अचानक वह गिर गए। परिजन सीएचसी ले गए तो डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति देख बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
सुबह तकरीबन 11 बजे परिजन रामबिलास को लेकर हैलट पहुंचे। यहां इमरजेंसी में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जालौन निवासी शिवप्रसाद (64) को भी डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हैलट के न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता के मुताबिक अक्सर ठंड में ब्रेन स्ट्रोक व हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सोमवार को ही हैलट में ठंड से बीमार होकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 15 से ज्यादा थी।
ऐसे में लोगों को खासकर वृद्ध लोगों को ठंड से बचाने की जरूरत होती है।
क्यों होता है ब्रेन स्ट्रोक
ठंड से दिमाग की नसें सिकुड़ती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने से नसें फट जाती है। इसे ही ब्रेन स्ट्रोक कहा जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए यह करें
शारीरिक श्रम करें, तड़के और रात में घर से बाहर निकलने से बचें, बाहर निकलें तो गर्म कपड़े पहनकर ही निकलें, हार्ट के मरीजों को दवाएं समय में खानी चाहिए, बीपी चेक कराते रहें।
हैलट इमरजेंसी में सोमवार को ठंड से बीमार होेकर 15 से ज्यादा मरीज पहुंचे।