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जिन्हें 43 साल पहले छाेड़ दिया था सड़क पर, अमेरिका से माता-पिता को ढूंढने अाईं ठुकराई गई बेटियां

Wed, 07 Feb 2018 09:51 PM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
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कृपा कपूर अाैर रेगिका निर्मला
माता-पिता ने तो उन्हें जन्म लेते ही 43 साल पहले ठुकरा दिया था, लेकिन उन्हें कोई शिकवा नहीं है, बल्कि वह माता-पिता को ढूंढने के लिए अमेरिका के वाशिंगटन से कानपुर आ गई हैं। दोनों का यही कहना है कि अगर उनके माता-पिता मिल जाते हैं, तो वह उन्हें अपने साथ अमरीका ले जाएंगी। यह उन दो बेटियों का दास्तां है, जो सड़क पर छोड़ दी गई थीं।
   



 
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माता पिता ने जन्म के बाद छाेड़ दिया था सड़क पर

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स्टेफनी कृपा कूपर
स्टेफनी कृपा कूपर और रेगिका निर्मला पिकॉक मंगलवार को वाशिंगटन से कानपुर पहुंच गई हैं। सन् 1975 में जन्म के बाद स्टेफनी सड़क पर पड़ी मिली थीं। इनको मिशनरी सोसाइटी की ओर से संचालित शिशु भवन ने अपना लिया। कुछ दिनों बाद उनको शिशु भवन की दिल्ली शाखा में भेज दिया गया। वहां एक अमरीकी परिवार ने उन्हें गोद ले लिया। इसके बाद वह वाशिंगटन पहुंच गईं।

 
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स्टेफनी वकील, वक्ता और फुटबॉल की कोच हैं

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रेगिका निर्मला पिकॉक
इसी तरह रेगिका भी उसी साल सड़क पर पड़ी मिली थीं। कुछ समय उनका भी पालन-पोषण भी शिशु भवन में हुआ। इसके बाद एक अमेरिकी महिला ने इनको भी गोद ले लिया और रेगिका भी अमेरिका पहुंच गईं। स्टेफनी और रेगिका को उनके अभिभवकों ने खूब पढ़ाया-लिखाया। अब रेगिका वाशिंगटन में शिक्षिका हैं। वहीं, स्टेफनी वकील, वक्ता और फुटबॉल की कोच हैं। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में काफी पहचान बना चुकी हैं।

 

हिंदुस्तानी और अमरीकी नामों का मिश्रण

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रेगिका निर्मला पिकॉक
स्टेफनी कृपा कूपर को शिशु भवन में कृपा नाम दिया गया था। उनको अमेरिकन महिला मर्लीयन बैक्सट्रोम ने गोद लिया। मर्लीयन ने कृपा को स्टेफनी कृपा कूपर नाम दिया। इसी तरह रेगिका निर्मला पिकॉक को शिशु भवन में निर्मला नाम दिया गया था। उन्हें वाशिंगटन के लियोनार्ड जेनसन और उनकी पत्नी जूडी ने गोद लिया था। अमरीकी दंपति ने उनको रेगिका निर्मला पिकॉक नाम दिया।  

 
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वाशिंगटन में हुई मुलाकात

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कृपा कपूर
स्टेफनी और रेगिका एक-दूसरे से वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में मिली थीं। वहीं पर उनकी मुलाकात सुमित्रा से हुई। सुमित्रा भी ठुकराई गई बेटियों में से एक हैं। तीनों ने मिलकर 2012 में ‘लॉस्ट सारी’ नाम की संस्था बनाई है, जो ऐसे माता-पिता की मदद करती है, जो किसी बच्चे को गोद लेना चाहते हैं। तीनों एक-दूसरे को बहन मानती हैं।
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