कारोबार भी मौत का कारण बन सकता है? यह तो किसी ने सोचा नहीं था। पर, यह सच है कि पैसे की अधिक लालसा, वर्चस्व की लड़ाई और अवैध कारोबार से की हुई कमाई पर खून के छींटे लगे रहते हैं। जी हां, ये मौत के कारोबार की हकीकत है।
ये हैं मौत के कारोबार
औरैया में बेरोक-टोक अवैध खनन का धंधा चलता है। इसी अवैध खनन के धंधे ने दो मासूमों की जान निगल ली। औरैया के अजीतमल कोतवाली के बेरी कपड़िया गांव में अवैध खनन से बने तालाब में दो बच्चे जानवरों को पानी पिलाने ले गए थे। यहां दोनों की डूबने से मौत हो गई।
सूचना पर पहुंचे परिजनों व ग्रामीणों ने शवों को बाहर निकाला। एसडीएम ने परिवारीजनों को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने खेत मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए भी कहा है।
गांव के मान सिंह की छह साल की पुत्री स्वाति व राजेश का दस साल का बेटा आशू सुबह बच्चों के साथ जानवराें को तालाब में पानी पिलाने ले गए थे। ये बच्चे वहीं नहाने लगे। इसी बीच पैर फिसलने से स्वाति व आशू डूबने लगे। बच्चों ने गांव पहुंचकर इनके परिवारीजनों को बताया। परिजन व ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। इन्होंने तालाब में घुसकर राहुल का शव बाहर निकाला।
आधे घंटे बाद स्वाति का शव मिला। बच्चों की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। एसडीएम अजीतमल अमित राठौर, सीओ अजीतमल व कोतवाली प्रभारी संजय मिश्रा मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसडीएम अमित राठौर ने परिवारीजनों को ढांढस बंधाया। इन्होंने मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष से डेढ़ लाख रुपये की सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
भट्ठा मालिकों को बेची गई थी मिट्टी
बच्चों के डूबने पर ग्रामीणों में खासा आक्रोश था। एसडीएम को ग्रामीणों ने बताया कि खेत पहले समतल था। हेतराम व चंद्रशेखर ने रुपयाें के लालच में पंद्रह साल पहले खेत की मिट्टी भट्ठा स्वामियों को बेच दी। इससे खेत में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। खेत बंबा के किनारे है। इससे गड्ढों में पानी भर गया। तीन सालों में खेत तालाब बन गया। इस तालाब में ग्रामीण जानवरों को पानी पिलाने व नहलाने के लिए ले जाते हैं। एसडीएम अजीतमल अमित राठौर ने बताया कि खेत मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए अजीतमल कोतवाली प्रभारी को आदेश दिया है।