कानपुर। बारिश के बाद चिड़ियाघर में टॉक्सीनिया बीमारी की चपेट में आए दो काले नर व मादा हिरण की मौत हो गई। बीमारी की सटीक जानकारी और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए दोनों के बिसरा जांच के लिए बरेली स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
चिड़ियाघर में काले हिरणों की संख्या 87 से अधिक है। जगह की कमी के कारण फिलहाल सभी को एक ही बाड़े में रखा गया है। पिछले महीने हुई मल की जांच में हिरणों में पेट के कीड़े पाए गए थे। डी-वॉर्मिंग की दवाओं का अपेक्षित असर नहीं होने पर चिड़ियाघर प्रशासन ने दवा का अलग घोल तैयार कर उपचार किया था। इसके बाद हिरणों की हालत में सुधार आया था। इसी बीच लगातार बारिश के दौरान दो काले हिरण टॉक्सीनिया की चपेट में आ गए। दोनों सुस्त रहने लगे और धीरे-धीरे उनका खाना कम हो गया। कमजोरी बढ़ने पर वे बार-बार बाड़े में गिरने लगे। डॉक्टरों की टीम ने उपचार शुरू किया तो कुछ सुधार दिखा लेकिन उनकी हालत पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। इससे करीब 10 दिन पहले बीमारी से ग्रसित एक मादा काले हिरण की मौत हो गई। इसके बाद दो दिन पहले भारी बारिश के दौरान एक नर हिरण ने भी दम तोड़ दिया। लगातार दो मौतों के बाद प्रशासन ने बाड़े में चूना डलवाने के साथ दवा का छिड़काव कराया है ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। चिड़ियाघर निदेशक डॉ. कन्हैया पटेल ने बताया कि बारिश के मौसम में काले हिरण टॉक्सीनिया की चपेट में जल्दी आते हैं। दोनों हिरणों ने भोजन कम कर दिया था और काफी कमजोर हो गए थे। उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।