पुखरायां रेल हादसे में आईएसआई की साजिश का खुलासा होने के बाद मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश की जांच भी तेज हो गई है। पुलिस और आरपीएफ मंधना, कानपुर और आस-पास रहने वाले बांग्लादेशियों के साथ-साथ इंजीनियरिंग, कृषि और मेडिकल कालेजों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
कई मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। पता किया जा रहा है कि कहीं आईएसआई के गुर्गों ने लालच देकर कुछ कश्मीरी छात्रों को स्लीपिंग माड्यूल्स तो नहीं बना दिया या किसी ने साजिश में साथ तो नहीं दिया। कहीं ऐसा तो नहीं कि अराजक तत्व रेकी करने और शरण पाने के लिए कश्मीरी छात्रों की मदद ले रहे हों।
कानपुर-फर्रूखाबाद रेल ट्रैक पर मंधना स्टेशन के पास 31 दिसंबर की देर रात किसी ने आरी से पटरी काट दी थी और 50 से ज्यादा पैंड्राल क्लिपें निकाल दी थीं। उस समय फर्रूखाबाद पैसेंजर गुजरने वाली थी लेकिन घंटों लेट होने के कारण ट्रेन बच गई थी। पुखरायां रेल हादसे में आईएसआई की साजिश का खुलासा होने के बाद मंधना कांड में भी आतंकी साजिश के सुराग तलाशे जा रहे हैं।
पता चला है कि कुछ लोग स्वयं को कश्मीरी विस्थापित बताकर मंधना के आस-पास के गांवों में शरण मांगने आए थे लेकिन लोगों ने उन्हें रुकने नहीं दिया था। एक संदिग्ध बंग्लादेशी कमरुद्दीन भी गांव में एक घर में किराए पर कमरा लेने आया था लेकिन मकान मालिक ने कमरा नहीं दिया था, तबसे कमरुद्दीन भी गायब है।
मंधना में जिस जगह पटरी काटी गई थी, वहां आरी का एक नया ब्लेड मिला था। यह ब्लेड रक्सौल (बिहार) का बना है इसलिए अब साजिश के तार बिहार और नक्सलियों से भी जुड़ रहे हैं। जांच से जुड़े एक अफसर ने बताया कि कश्मीर के छात्रों पर नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियां कॉलेजों के संपर्क में हैं।