इंडियन-यूरेशियन प्लेट टकराने से मंगलवार को नेपाल के कोडारी से 18 किलोमीटर दूर झाम में आए भूकंप के दो तेज और पांच छोटे (कुल सात) झटकों से कानपुर की धरती भी हिल गई। इससे दहशतजदा शहरवासी घर, दुकान और दफ्तर छोड़कर सड़क पर निकल आए। नवाबगंज और काकादेव के पुराने भवनों की दीवारें तक दरक गईं।
लोग पार्क, सड़कों और मैदान में भूकंप के झटकों पर चर्चा करते नजर आए। दहशतजदा लोग काफी देर तक घरों के भीतर जाने को तैयार नहीं दिखे। दूसरी तरफ आईआईटी के विज्ञानियों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है।
अगले चार महीने तक भूकंप के झटके (आफ्टर शॉक)लगते रहेंगे। 25, 26 अप्रैल को आए भूकंप और उससे हुई तबाही की यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ीं कि मंगलवार को आए भूकंप ने लोगों को जोर का झटका धीरे से दिया। पहला बड़ा झटका दोपहर 12:35 बजे 7.3 मैग्नीट्यूड का महसूस किया गया, फिर आफ्टर शॉक आए।
दोपहर 1:06 बजे 6.3 मैग्नीट्यूड का झटका लगा है, फिर ढाई बजे तक 5 से लेकर 5.2 मैग्नीट्यूड के पांच और झटके महसूस किए गए हैं। पहला और दूसरा झटका जबरदस्त था। आईआईटी के विज्ञानियों का कहना है कि यह सिलसिला अभी जारी रहेगा। इधर भूकंप की वजह से घरों में लगे पंखे और फ्रिज, अलमारी तक हिलने लगी।
यह देख शहरवासी कांप गए और फौरन जोर से चिल्लाते हुए घरों के बाहर भागे। दहशतजदा लोग काफी देर तक सड़कों पर टहलते रहे। घर के बाहर या पार्क में बैठे लोग कयास लगाते रहे देखना फिर भूकंप आएगा। भूकंप से आईआईटी के स्टूडेंट्स भी सहम गए और हॉस्टल खाली करके बाहर आ गए।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, यूपीटीटीआई, एचबीटीआई सहित तमाम शैक्षिक संस्थानों के हॉस्टल खाली हो गए।
इसी तरह का नजारा आईआईटी के कैंपस स्कूल का दिखा। यहां जूनियर स्कूल के बच्चे पढ़ते हैं, जो भूकंप आने के बाद भागकर भवन से बाहर आ गए। पार्क में ही बैठकर पढ़ाई की। प्रिंसिपल के समर्थन को लेकर राजकीय पालीटेक्निक में प्रदर्शन कर रहे शिक्षक, कर्मचारियों ने भूकंप के झटके महसूस किए और सभी भवन से बाहर भागकर आ गए।