जली हुई फसल देखते ग्रामीण
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ग्रामीणों और किसानों ने इस घटना के लिए बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि हाई टेंशन लाइन के नीचे खड़े पेड़ों की समय-समय पर छंटाई नहीं की जाती, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। यदि पहले ही पेड़ की छंटाई कर दी जाती, तो इस हादसे को रोका जा सकता था। घटना के बाद किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि शासन की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के तहत उन्हें राहत मिलनी चाहिए, ताकि इस नुकसान की भरपाई हो सके।