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Kanpur News: 1962 पर फोन करने पर नहीं मिल रहा उपचार

Sun, 11 Oct 2026 01:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। पशुओं को घर बैठे चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के दावे विभागीय लापरवाही के चलते खोखले साबित हो रहे हैं। जिले में 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने पर पशुओं को देखकर इलाज करने के बजाय चिकित्सक फोन पर ही दवा बता दे रहे हैं। कई बार होम्योपैथी की दवा बताई जा रही है। चिकित्सकों के मौके पर न पहुंचने से पशुपालकों को दवा खरीदने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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जनपद में 10 ब्लॉक हैं। बीमार मवेशियों के इलाज के लिए पशुपालन विभाग ने पशुचिकित्सा एंबुलेंस सेवा दी जाती है। कुल आठ पशुचिकित्सा एंबुलेंस तैनात हैं। प्रति एंबुलेंस में एक पशुचिकित्सक व अन्य स्टाफ तैनात रहता है। किसी पशुचिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर रिलीवर के लिए एक अतिरिक्त पशुचिकित्सक भी तैनात है। मौजूदा समय में मवेशी लंपी से पीड़ित हो रहे हैं। इसकी वजह भी कहीं न कहीं देरी से लंपी बचाव की वैक्सीन लगना है। अब मवेशियों में लंपी फैल गया। पशुपालक बीमार मवेशी का घर बैठे इलाज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल कर रहे हैं तो जिम्मेदार उन्हें बाहर की दवा बता रहे हैं। अब गांवों में यह दवाएं न मिलने से पशुपालक परेशान हो रहे हैं।
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बयान......
पशुचिकित्सा एंबुलेंस की सुविधा आपातकाल की स्थिति के लिए है। मवेशी के बीमार होने के अनुसार विशेषज्ञ पशुचिकित्सक द्वारा दवा बताई जा रही है। बताई गई दवाएं मेडिकल स्टोर पर आसानी से उपलब्ध हैं। कई बार पशुचिकित्सक बीमार मवेशी को जल्द आराम दिलाने के लिए दूसरी पैथी की सहायक दवाएं बता रहे हैं। - डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल, सीवीओ
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अवधि पूरी कर चुके पुराने ठेकेदार से ले रहे सेवा
पशुपालन विभाग के जानकारों के अनुसार पशुचिकित्सा एंबुलेंस सेवा का पुराना ठेका समाप्त हो चुका है। इस पर 1962 हेल्पलाइन निलंबित कर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पशुधन प्रसार अधिकारियों को बीते दिनों जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए पशुधन प्रसार अधिकारियों के मोबाइल नंबरों को सार्वजनिक किया गया था। इधर शासन स्तर पर तय हुआ था कि जब तक नया ठेकेदार नहीं मिल जाता तब तक पुराना ठेकेदार की 1962 की सेवाएं चलाएंगे। इसके बाद हेल्पलाइन नंबर सुचारु किया गया। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका लाभ पशुपालकों को नहीं मिल पा रहा है।
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लंपी का प्रकोप, दवा भी नहीं दे पा रहे
पशुपालन विभाग की ओर से जनपद में भले ही आठ एंबुलेंस लगी हैं लेकिन धरातल पर हालात खराब हैं। पशुपालकों का कहना है कि लंपी बीमारी से बचाव के लिए समय पर टीका नहीं लग सका। इसकी वजह से संक्रमण तेजी से फैल गया। अब पशु बीमार हैं लेकिन इलाज की उम्मीद भी पूरी नहीं हो रही है। हेल्पलाइन पर संपर्क करने पर उचित इलाज या एंबुलेंस सेवा के स्थान पर केवल दवा के नाम सुझाए जा रहे हैं।
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केस एक :
डॉक्टर से नहीं कराई बात, ऑपरेटर ने बता दी दवा
अकबरपुर के नरिहा निवासी रामखिलावन ने बताया कि बृहस्पतिवार को गाय बीमार हुई थी उसके इलाज के लिए 1962 पर फोन किया। दूसरी ओर से बोल रहे ऑपरेटर को बताया कि तीन साल की गाय चारा नहीं खा रही है। इस पर हेल्पलाइन पर ऑपरेटर ने डॉक्टर से बात कराने की बात कही। मगर डॉक्टर से बात नहीं कराई। कुछ देर बाद ऑपरेटर ने ही जल्दी में दवा बता दी और फोन काट दिया। समझ नहीं पाए कि क्या दवा बताई है।
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केस दो :
होम्योपैथी की दवा बताई, मिली ही नहीं
रसूलाबाद के सिमरामऊ निवासी महेश प्रसाद ने बताया कि एक साल की बछिया को बुखार व लंपी के लक्षण हैं। शनिवार को बछिया ने चारा खाना बंद कर दिया तो हेल्पलाइन नंबर 1962 पर फोन किया। दूसरी तरफ से बोल रहे ऑपरेटर ने डॉक्टर से बात कराई। डॉक्टर ने तीन दवाएं बताईं। इसमें एक होम्योपैथी की पिलाने वाली दवा बता दी। कई मेडिकल स्टोर पर गए मगर वो दवा मिली ही नहीं।
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