एक हजार व पांच सौ के नोट बंद होने से कानपुर की ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री पूरी तरह से ठप हो गई है। इससे आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो सकती है। फैक्ट्रियों में उत्पादन और ट्रेडिंग प्रभावित होने से 90 फीसदी ट्रांसपोर्टरों को बीते एक सप्ताह से नया आर्डर नहीं मिला है। जिन ट्रांसपोर्टरों का माल रास्ते में था, उनके भी ट्रक डिलीवरी के बाद खड़े हो गए हैं।
दरअसल ट्रांसपोर्ट कारोबार पूरी तरह से कैश पर निर्भर है। देशभर में इस इंडस्ट्री को चलाने के लिए प्रतिदिन करीब 1500 करोड़ रुपये के कैश की जरूरत होती है। रास्ते में आने वाले खर्चों के लिए ट्रक चालकों को 35,000 रुपये तक साथ रखने की इजाजत है। इस तरह से जिसके पास 10 या 20 ट्रक हैं उसे 3.5 लाख से सात लाख रुपये तक चलन वाली मुद्रा चाहिए। आठ नवंबर के बाद से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। चलन वाली मुद्रा की भारी किल्लत है और ट्रकों में रास्ते में आने वाले खर्च की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हजार व पांच सौ के नोटों को बदलने या जमा करने का भी दबाव है। इसके अलावा फैक्ट्रियों में भी उत्पादन ठप है। माल की ट्रेडिंग पूरी तरह रुक गई है। कानपुर के 20 फीसदी ट्रक तो जहां के तहां ठहर गए हैं।