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Kanpur News: चंदे के पुल पर आवागमन, फाइलों में उम्मीदें

Mon, 06 Jul 2026 01:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात/रसूलाबाद। जनपद के रूरा क्षेत्र से निकला खारजा और रसूलाबाद के मिर्जापुर लकोठिया में पांडु नदी पर लोगों ने बांस-बल्ली से अस्थायी पुल बनाया है। कई बार शिकायत करने के बाद भी पुल का निर्माण सिर्फ फाइलों में घूम रहा है। दोनों जगहों पर आवागमन में परेशानी होने पर 18 गांवों के लोगों ने चंदा जुटाकर आवागमन के लिए अस्थायी पुलों का निर्माण करवाया है।
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रूरा के करीब भवंरपुर गांव में लोग नहर के खारजा पर बनाए बांस-बल्ली के पुल से दूसरी ओर खेतीबाड़ी करने जाते हैं। इस पुल से छह गांवों के लोगों का आवागमन होता है। अशोक, रामभरोसे व कमलेश आदि ने बताया कि बांस-बल्ली के पुल से हादसे का खतरा बना हुआ है। बारिश में खारजा भरा रहता है। जरा सी चूक हादसे की वजह बन सकती है। अप्रैल में समस्या की जानकारी होने पर राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने स्थलीय निरीक्षण कर समाधान करने का भरोसा दिया था। तब से ग्रामीणों को पुल की आस बनी हुई है।



इधर रसूलाबाद के मिर्जापुर लकोठिया के मजरा बंदरहा में विकास की तस्वीर अधूरी है। कानपुर देहात, कानपुर नगर व कन्नौज सीमा से सटे इस गांव में पांडु नदी पर आवाजाही के लिए चंदा कर लोगों ने बांस-बल्ली से अस्थायी पुल बनाया। बाद में छह आरसीसी के खंभों बनवाए गए और इसी पर बांस-बल्ली लगा कर आवाजाही शुरू कर दी गई। यह अस्थायी पुल करीब 12 गांवों की जीवनरेखा बना है। अजीत, अशोक, अंकित, अक्षय आदि ने बताया कि बांस-बल्ली के पुल से बंदरहा, बकौठिया, लकोठिया, कोला, पछयान पुरवा समेत करीब 12 गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। सड़क मार्ग से करीब 11 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इसके चलते बांस-बल्ली के पुल से सिमरिया की ओर जाने पर केवल तीन किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है।
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अस्थायी पुल पर टिका बच्चों का भविष्य
रसूलाबाद। मिर्जापुर लकोठिया के मजरा बंदरहा व अन्य 12 गांवों के छात्रों को इंटर की पढ़ाई के लिए सिमरिया के स्कूल जाना पड़ता है। सबसे बड़ी परीक्षा पुल पार करने की है। गांव व आसपास कोई कोई इंटर कॉलेज नहीं है। सिमरिया में इंटर कॉलेज है। ऐसे में इसी पुल से होकर अधिकांश छात्र-छात्राएं प्रतिदिन पढ़ने जाते हैं। कई अभिभावक स्कूल की छुट्टी के समय इसी पुल के पास आकर बच्चों के आने का इंतजार करते हैं। रामप्रसाद, रामबाबू, विमल आदि ने बताया कि बरसात के दिनों में चिंता और बढ़ जाती है, क्योंकि तेज बहाव के बीच बच्चों का पुल से निकालना बड़ा जोखिम भरा हो जाता है। (संवाद)
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फोटो- 8 अजीत, बंदरहा।
फोटो- 9 अशोक, बंदरहा।
आश्वासन नहीं, अब समाधान चाहिए
नजदीकी गांव सिमरिया तक जाने के लिए बांस-बल्ली का पुल जरूरत बन चुका है। सिमरिया में ही बाजार है। इंटर कॉलेज है। सड़क से दूसरा रास्ता लंबा है। चुनाव के समय नेता आते हैं आश्वासन देकर चले जाते हैं। अब स्थायी पुल बने इसके लिए आश्वासन के बजाय समाधान चाहिए। - अजीत, बंदरहा।
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बांस-बल्ली के पुल से होकर बरसात के दिनों में हर सफर जान जोखिम में डालकर करना पड़ता है। शासन और प्रशासन से पांडु नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराए जाने की मांग की गई है। पुल बनेगा तभी आसपास के 12 गांवों में विकास की राह खुलेगी। - अशोक, बंदरहा।
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बयान.......
बंदरहा में पांडु नदी पर बांस-बल्ली का अस्थायी पुल बनाकर लोगों के आवागमन की दुश्वारी को दूर करने के लिए स्थायी पुल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसी माह इसपर निर्णय की उम्मीद है। - पूनम संखवार, विधायक रसूलाबाद
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रूरा के पास भवंरपुर में खारजा नगर पर बनाए गए बांस-बल्ली के पुल का स्थलीय निरीक्षण अप्रैल में किया था। यहां आवाजाही के लिए पुल की जरूरत है। इसके लिए जरूरी पत्राचार किया गया है। शासन से मंजूरी मिलने पर पुल बनाया जाएगा। - प्रतिभा शुक्ला, राज्यमंत्री (विधायक अकबरपुर-रनियां)
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