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Kanpur News: कोरोना से बेटी को बचाने के लिए किचन में खड़ी की बॉडी केयर इंडस्ट्री

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क्राफ्ट रुट प्रदर्शनी में अपने स्टाल पर उद्यमी यशस्वी देसाई....  - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर। नवजात बेटी को कोरोना से बचाने के लिए गुजरात की इंटीरियर डिकोरेटर यशस्वी देसाई ने किचन में बॉडी केयर इंडस्ट्री ही बना ली। साबुन, बालों का तेल, फेस क्रीम, टूथ पाउडर सब कुछ किचन में उपलब्ध सामान से बना लिया। शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल से बचाव के लिए यह प्रयोग आज उद्योग के रूप में खड़ा हो गया। इसे देश भर में पसंद किया जा रहा है।
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ग्रामश्री संस्था की ओर से चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में लगी प्रदर्शनी में यशस्वी देसाई का भी स्टाल लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में जब कोरोना फैला था तो डर था कि बाहर का सामान लेने पर घर में संक्रमण फैल सकता है। बेटी पैदा हुई थी। उसे संक्रमण से बचाने के लिए घर के सामान से ही उत्पाद बनाने शुरू किए। इसमें नारियल और तिल का तेल, देसी घी, मेथी,
कलौंजी, तिल आदि का इस्तेमाल किया।
उन्होंने बताया कि नारियल के तेल में तुलसी उबाल कर मॉश्च्युराइजर बनाया। देसी गाय के घी से त्वचा क्रीम बनाई। नारियल के तेल और तनजोत की जड़ से लिप बाम तैयार की। नीम की छाल को पीसकर टूथ पाउडर बनाया। बताया कि कोरोना के समय पूरा परिवार गांव में ही रहा। शुरुआत में ज्यादातर उत्पाद किचन में उपलब्ध चीजों से बनाए। इनका इस्तेमाल कर खुद फायदा देखा।
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देसाई ने बताया कि करीब 25 उत्पाद तैयार किए हैं। अब च्यवनप्राश आदि भी तैयार कर रही हैं। बाजार में बिक रहे केमिकल वाले उत्पाद त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन घर की चीजों से लोग खुद काम की चीजें तैयार कर सकते हैं। बताया कि देश के हर बड़े शहर में उनके उत्पादों को लोगों ने पसंद किया। उद्यम का नाम स्वत्व नेचुरल रखा है।
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पसंद की गई मधुबनी पेंटिंग
मधुबनी बिहार के हस्तशिल्पी अजय कुमार झा पेंटिंग लेकर क्राॅफ्ट रूट में आए हैं। उन्होंने बताया कि यह पेड़ की छाल, फूल की पत्ती और बांस की कलम से तैयार की जाती है। बताया कि जातियों के लिहाज से लोग मधुबनी पेंटिंग बनाते हैं। ब्राह्मण महाभारत और रामायण पेंटिंग, कायस्थ कचनी पेंटिंग, अनुसूचित जाति के लोग गोदना पेंटिंग के विशेषज्ञ होते हैं। तंत्र विद्या से जुड़े लोग मां काली, भैरव आदि तांत्रिक पेंटिंग बनाते हैं।
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कपड़ों और लाख की चूड़िया पसंद की
कन्वेंशन सेंटर में लगी प्रदर्शनी के दूसरे दिन लोगों ने कपड़े और लाख की चूड़ियां सबसे अधिक पसंद कीं। लाख के झुमके, चूड़ियां बच्चियों ने भी पसंद किए। वहीं राजस्थानी ज्वैलरी भी महिलाओं को बहुत भायी। बंगाल के स्टाल पर हस्तशिल्पियों ने पेंटिंग से जुड़ा गीत भी सुनाया। इन चित्रों को गीत के आधार पर तैयार किया गया।
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