नवंबर 2014 में दुधवा नेशनल पार्क से भटक कर आ गई बाघिन ‘कटरीना’ ने एक बार फिर गंगा कटरी क्षेत्र में दस्तक दी है। शनिवार रात कटरीना ने कन्हवापुर गांव में एक नीलगाय का शिकार किया। ग्रामीणों ने सुबह जाकर देखा तो मिट्टी में बाघिन के पंजे के निशान और शिकार का खून बिखरा मिला। कुछ देर में ही पूरी कटरी में ‘बाघ आया बाघ आया’ का शोर मच गया। इससे पूरी कटरी में दहशत है।
कुछ महीने पहले बाघिन के गंगा कटरी से चले जाने की खबर से निश्चिंत ग्रामीणों में एक बार फिर से दहशत भर गई है। गंगा बैराज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव कन्हवापुर के खेतों में फसल की रखवाली कर रहे किसानों ने बताया कि शनिवार रात गांव के जगन्नाथ के खेतों से नीलगाय के चिल्लाने की आवाजें आईं, लेकिन उस समय किसी की हिम्मत वहां जाने की नहीं पड़ी। रविवार तड़के चार बजे जब किसानों ने वहां पर जाकर देखा तो वहां बाघिन के पंजों के निशान मिले।
थोड़ी दूर पर बाघिन द्वारा एक नीलगाय का शिकार करने के दौरान बहा खून भी पड़ा दिखा। इसके अलावा लोगों ने उस स्थान पर बाघिन द्वारा नीलगाय को खींचकर जंगल की ओर ले जाने के भी निशान देखे। इसकी सूचना आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई और लोग वहां पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को दी है।
बता दें कि अक्तूबर 2014 में यह बाघिन दुधवा नेशनल पार्क से बाहर निकल गई थी और फिर भटकते-भटकते सीतापुर, मिश्रिख, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव होते हुए गंगा पार करके कटरी में आ गई। नवंबर 2014 में कई जानवरों का शिकार करने के बाद जब जंगल में नाइट विजन कैमरे लगाए गए तो इसकी फोटो कैद हो गई थी।
तब वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ और वन विभाग की टीम इसको पकड़ने के लिए लगाई गई थी। दुधवा से दो प्रशिक्षित हाथी भी बुलवाए गए थे। करीब छह महीने तक कॉंबिंग चली थी लेकिन बाघिन पकड़ में नहीं आई। फिर बाघिन गायब हो गई और सबने समझा कि वह कटरी क्षेत्र से चली गई है लेकिन, अब उसने फिर कटरी का रुख कर लिया है। वाइल्ड लाइफ और वन विभाग वालों ने बाघिन को कटरीना नाम दिया था।