वन विभाग व पुलिस टीम के साथ मौजूद बाघ का शिकार करने वाले आरोपी (फाइल फोटो)
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चित्रकूट में प्यासे बाघ की करंट लगाकर हत्या मामले में शुरू से वन विभाग मझगवां से लेकर उसी तरह की लापरवाही कर रहा था। जिस तरह चित्रकूट के निही व गढ़चपा में तेंदुआ की हत्यारोपियों को पकड़ने में चित्रकूट वन विभाग की टीम कर रही है।
शायद इसी का नतीजा है कि तीनों आरोपी वन विभाग के अधिकारियों की आंखों में धूल झाेंककर अभिरक्षा से फरार हो गए। अदालत से रिमांड मिलने के बाद आरोपी रज्जन कोल ,राजेश उर्फ धीरू मवासी व ज्वाला चौधरी को आखिर पुलिस अभिरक्षा में नहीं रखा गया। जिस रेस्ट हाउस के कमरे में तीनों आरोपियों को रखा गया उसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। रेस्ट हाउस के सामने ही मझगवां पुलिस थाना है, लेकिन आरोपियों को वहां नहीं रखा गया।
इस मामले में डीएफओ सतना राजीव कुमार मिश्रा ने कोई जवाब नहीं दिया कि आखिर तीनों को रेस्ट हाउस में बिना सुरक्षा रखा गया और पुलिस थाने में क्यों नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय पांच कर्मचारियों पर कार्यवाई कर दी गई है। शिकार के मामले की जांच जारी है। उसकी रिपोर्ट आने पर यदि कोई वनकर्मी भी शामिल होगा तो उस पर भी कार्रवाई होगी।
बाघ की हत्या के आरोपियों को वन विभाग के रेस्ट हाउस के जिस मीटिंग हाल में रखा गया था उसमें दो रोशनदान हैं। इसमें शीशे का कवर लगा है। वहीं हाल में दो साइन बोर्ड भी रखे हैं। वन विभाग के रेंजर एसएन पांडेय ने बताया कि बुधवार की देर रात को ही ज्वाला चौधरी का बेटा मिलने आया था। वह काफी देर तक कमरे में उनके साथ रहा। संभावना है कि उसके साथ मिलकर तीनों ने योजना बनाई। इसके बाद कुछ स्थानीय लोगों ने दबी जुबान में बताया कि ज्वाला का बेटा ही रात 12 बजे के बाद रोशनदान वाले मार्ग की ओर आया था और वहीं से तीनों उसकी मदद से भाग निकले हैं।