अगर इस परिधि में कहीं भी जलभराव है,तो मच्छर डेंगू संक्रमित कर सकता है। रोग से बचने के लिए क्षेत्र का साफ होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई साल पहले जब डीडीटी से मच्छर रिसेस्टेंट हुए तो अध्ययन कराया गया था। उसमें यह स्थिति सामने आई थी, ठीक वैसी ही स्थिति अब भी है।
अगर सही ढंग से फॉगिंग नहीं हुई तो मच्छर नहीं मरेगा। धुएं से बेहोश भर हो सकता है। इसके बाद और रिसेस्टेंट हो जाएगा। एडीज मच्छर अब सालभर जीवित रहता है। कड़कड़ाते जाडे़ और झुलसाऊ गर्मी में बिल्कुल खत्म नहीं होता।
गोधूलि में फॉगिंग करें बाहर, दिन में अंदर
जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह का एडीज एजिप्टाई मच्छर दिन में बाहर नहीं निकलता, वह घर के अंदर रहता है। गोधूलि बेला में जब सूर्यास्त होता है, तो ये प्रजनन के लिए बाहर निकलते हैं। इस वक्त बाहर फॉगिंग की जानी चाहिए।
दिन में घरों के अंदर फॉगिंग तो ये मर जाएंगे। उड़ता हुआ मच्छर धुएं की चपेट में आकर मरता है। अगर बैठा है तो कोने-कोने में हल्का धुआं जा पाता है, उसे यह बर्दाश्त कर लेता है। इसके साथ ही मच्छरों की पनाहगाहें भी बढ़ गई हैं। छिटपुट फॉगिंग कर देने से इस पर अधिक असर नहीं होगा।