कानपुर। प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूपीसीएसटी) ने वर्ष 2025-26 के लिए संस्थान की तीन शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को कुल 30.08 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है।
पीएसआईटी के इलेक्ट्रानिक्स विभाग, कंप्यूटर साइंस और फार्मेसी विभाग को यह उपलब्धि हासिल हुई है। अधिकारियों का दावा है कि तीन शोध परियोजनाओं को एक साथ पाने वाला पीएसआईटी अकेला संस्थान है। चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि यह संस्थान के लिए गर्व का क्षण है।
इन परियोजनाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। वहीं डाॅ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि यह सफलता हमारी मेहनत और शोध क्षमता का परिणाम है। आने वाले समय में संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
इन विभागों में मिली शोध परियोजना
इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग : बायो-सेंसिंग तकनीक करेगा विकसित
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग को ट्रिपल मेटल वर्टिकल टीएफईटी डिवाइस पर आधारित शोध के लिए आठ लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इस परियोजना का नेतृत्व ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला और निदेशक प्रो. राघवेंद्र सिंह कर रहे हैं। यह शोध बायो-सेंसिंग तकनीक को विकसित करेगा जिससे बीमारियों की शुरुआती पहचान संभव हो सकेगी।
कंप्यूटर साइंस विभाग : ब्लॉक चेन से सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग को 7.72 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। परियोजना का नेतृत्व डॉ. मनमोहन शुक्ला, डॉ. विशाल नागर, डॉ. बृजेश कुमार चौरसिया और मुख्य अन्वेषक डॉ. रोहित सक्सेना कर रहे हैं। इस शोध का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत ग्रेड कार्ड और क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम को ब्लॉक चेन आधारित सुरक्षित व पारदर्शी बनाना है।
फार्मेसी विभाग : हर्बल दवाओं पर आधुनिक शोध
पीएसआईटी-फार्मेसी विभाग को 14.36 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। नेटवर्क फार्माकोलॉजी और मॉलिक्यूलर डॉकिंग पर आधारित यह शोध मधुमेह और उसकी जटिलताओं के इलाज में उपयोगी हर्बल इमल्जेल विकसित करने पर केंद्रित है। इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. अंकिता वाल कर रही हैं जबकि सह-अन्वेषक डॉ. प्रणय वाल और डॉ. आशीष श्रीवास्तव हैं।