यूपी के फतेहपुर जिले में पुलिस की एक और कारगुजारी ने विभाग को शर्मसार किया है। जुए के अड्डे से वसूली करते तीन पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप मच गया। प्रकरण बिंदकी कोतवाली का है। एसपी राहुल राज ने कोतवाली में तैनात सिपाही कन्हैया, हेमंत वर्मा, अनुज कुमार को निलंबित कर मामले की जांच सीओ जाफरगंज को सौंपी है।
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वायरल हुए वीडियो में तीन सिपाही कोतवाली क्षेत्र के पैगंबरपुर मोहल्ले में संचालित जुए के अड्डे पर जाते हुए दिखाई देते हैं। अलग-अलग अड्डों पर जुआरियों का जमघट लगा है। सिपाहियों के पहुंचने के बाद भी यहां न हड़कंप मचता है न भगदड़ जैसी स्थिति है। अड्डों पर जुआरी बेखौफ होकर जीत-हार की बाजी लगा रहे हैं। तीनों सिपाही एक अड्डे के पास कुछ देर खड़े रहते हैं।
एक सिपाही जुआरियों को इशारा करता था। इशारा मिलते ही एक-एक कर सभी जुआरी अपने हिस्से की रकम निकालते हैं और सिपाही को थमा देते हैं। उसे मुठ्ठी में रकम दबाकर साथी सिपाहियों के साथ जाते हुए दिखाया गया है। मामले को पुलिस अधीक्षक राहुल राज ने संज्ञान में लिया। तीनों सिपाहियों की छानबीन कराई। प्रथम दृष्टया दोषी मिलने पर निलंबन की कार्रवाई की।
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जूता कांड चर्चा का विषय बना
एसपी ने बताया कि मामले की जांच सीओ जाफरगंज को सौंपी गई है। वसूली में शामिल पुलिस कर्मियों की गोपनीय जांच कराई जाएगी। वसूली में शामिल किसी पुलिस कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। वायरल वीडियो कब बनाया गया है, इसका पता जांच के बाद ही लगेगा।
फतेहपुर जिले में इन दिनों पुलिस वसूली की होड़मची है। सिपाही, होमगार्ड सिर्फ प्यादे होते हैं। उनके अपरोक्ष रूप से शामिल अधिकारियों तक जांच की आंच भी नहीं पहुंचती है। पिछले एक माह में वसूली को लेकर खुलेआम वसूली का चौथा मामला सामने आया है। पुलिस संरक्षण में चर्चित अड्डों में जुआरखाने संचालित हो रहे हैं। उनका पुलिस बाल भी बांका नहीं कर पाई है।
बता दें शहर के नउवाबाग जेल रोड पर वाहनों से शाम ढलने से लेकर सुबह तक वसूली का खेल होता है। पिछले माह एक नहीं दो बार वसूली के खेल से पर्दा उठा। चौकी इंचार्ज समेत कई पुलिस कर्मी निलंबित हुए। इसी तरह एक हफ्ते पहले शाह रोड पर वाहनों से पुलिस की वसूली का भांडाफोड़ हुआ। आरोपी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई हुई। कार्रवाइयों के बाद पुलिसकर्मी सबक लेने को तैयार नहीं है।
तीन सिपाही जुआरखाने में वसूली करते पकड़े गए
बिंदकी कोतवाली के तीन सिपाही जुआरखाने में वसूली करते पकड़े गए। खबर है कि शहर के रानी कालोनी इलाके में ओहदेदार जुआरखाने की मंडी सजाए हैं। दो साल पहले पुलिस ने चर्चित अड्डे में छापेमारी की थी। जिसके बाद से पुलिस कभी भी अड्डे में छापेमारी की हिम्मत नहीं जुटा सकी। खेल कई सालों से लगातार होता आ रहा है।
इसी तरह हरिहरगंज में चर्चित जुआं की फड़ सजती है। चौक इलाके में एक कारोबारी जुआरखाने का संचालन करता है। उसकी पैठ सिपाही से लेकर अधिकारियों तक की है। सैयदबाड़ा मोहल्ले में आबाद फड़ में पुलिस की निगाह कभी टेड़ी नहीं होती है। यहां एक साल पहले जुआं पकड़ा गया था। संचालकों को पुलिस ने मौके से छोड़ दिया था।
पनी मोहल्ला, किशनपुर, खागा, हुसैनगंज, बिंदकी में जुआं के बड़े अड्डे संचालित होते हैं। इन दिनों हाइवे पर पशु माफियाओं के वाहनों से वसूली की होड़ मची है। शहर के लखनऊ, भिटौरा बाइपास, टोल प्लाजा, छिवली बार्डर, थरियांव हाइवे समेत चिन्हित जगहों पर तस्करों के वाहनों वसूली की जा रही है। पशुओं के वाहनों के चालक पुजापा चढ़ाते हाइवे से निकल जाते हें।
महकमे में इन दिनों से एक चर्चित सिपाही का प्रापर्टी कारोबारी से ब्रांडेड कंपनी का जूता लेने के लिए मोटी रकम लेने का मामला चर्चा में है। करीब एक हफ्ते से खबर हर तरफ हड़कंप मचाए है। महकमें में सिपाही की मजबूत पकड़ बताई जाती है। कारोबारी से बातौर जूते की रकम 17 हजार ली है। जूते खुद के लिए नहीं बल्कि किसी को उपहार में देने के नाम से लिए गए हैं। बाद में खुद खरीद कर पहन लिए।
उसका बैकग्राउंड जानने के बाद पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी तक चौंक जाते हैं। कानपुर में तैनाती के दौरान सिपाही की लूटकांड में संलिप्तता पाए जाने पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी। सिपाही के पास कई लग्जरी वाहन हैं। आमतौर पर एक साधारण चार पहिया सिपाही का रखना मुश्किल होता है।