हमीरपुर में जमीन के विवाद में बहू को जिंदा जलाकर मारने के मामले में सास, ससुर और देवर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) अनिल कुमार शुक्ल की अदालत से तीनों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
शासकीय अधिवक्ता शैलेष स्वरूप चौरसिया ने बताया कि पथनौड़ी निवासी रुपेंद्र कुमार अपने नाना राधाचरण के साथ मझगवां क्षेत्र के बरेल गांव में बच्चों के साथ रहते थे। रुपेंद्र ने दो जून 2016 को राठ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पथनौड़ी में रह रहे उसके पिता वृंदावन, सौतेला भाई देवेंद्र कुमार व सौतेली मां कस्तूरी देवी ने 31 मई 2016 की सुबह नाना की जमीन को लेकर उससे मारपीट की।
बचाने आई उसकी पत्नी कोमल को खींचकर एक तरफ ले गए और मिट्टी का तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। इलाज के दौरान एक जून 2016 को उसकी मौत हो गई लेकिन मरने से पहले राठ के एसडीएम को कोमल ने बयान दर्ज करा दिए थे।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अभियुक्त बनाए गए कोमल के सास-ससुर, देवर ने निचली अदालत और हाईकोर्ट से जमानत निरस्त होने पर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका निरस्त कर जिला स्तर पर रोज सुनवाई कर मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए कहा था। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) अनिल कुमार शुक्ल ने 25 दिनों में सुनवाई पूरी करते हुए ससुर वृंदावन, सास कस्तूरी व देवर देवेंद्र को उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है।