जीएसटी लागू करते समय जीएसटी काउंसिल व सरकारों को छोटे एवं मध्यम उद्योगों के हितों का ध्यान रखना होगा। केंद्रीय जीएसटी में वस्तु की सप्लाई की स्थिति में उत्पादक कारोबारी पर करमुक्त सीमा कम से कम तीन करोड़ रुपये निर्धारित की जानी चाहिए। तभी देश के कुटीर, लघु एवं मध्यम श्रेणी के निर्माता एवं व्यापारी टैक्स की मार से बच सकेंगे। वर्ना भारी भरकम पूंजी वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला आसान नहीं होगा और छोटे उद्योगों पर संकट मंडराएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रकाश ने शुक्रवार को वाणिज्यकर भवन में यह बात कही। वे टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता शामिल थे। उन्होंने बताया कि एक राज्य से दूसरे राज्य में माल की आपूर्ति पर केंद्र सरकार टैक्स वसूलेगी। इससे प्राप्त राजस्व का बंटवारा जीएसटी काउंसिल की ओर से राज्य और केंद्र के बीच किया जाएगा।
देश के बाहर से आयात पर वस्तु एवं सेवाकर इसी केंद्रीय जीएसटी के दायरे में आएगा। सेवा एवं वस्तु को एक ही परिभाषा के दायरे में लाया गया है, लेकिन मानव उपयोग में लाई जाने वाली शराब को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सेवा की परिभाषा को अधिक व्यापक बनाया गया है। वस्तु के अलावा अन्य सभी गतिविधियां सेवा के दायरे में आएंगी। गोष्ठी की अध्यक्षता एके दरबारी व संतोष कुमार गुप्ता व संचालन अरुण अहूजा ने किया। यहां एसबी पांडेय, वीके निगम, हरिओम गुप्ता, पंकज श्रीवास्तव, आरवी पांडेय आदि मौजूद रहे।