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"मोदीजी के वादे के मुताबिक 15 लाख की पहली किस्त साढ़े 3 लाख रुपये आ गई", अब सब झाड़ रहे पल्ला

Fri, 13 Jul 2018 09:27 AM IST
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

- महिला के खाते में गलती से पहुंचे साढ़े तीन लाख, बोली, ये तो मोदी जी ने दिए
- सेवानिवृत्त नगर निगम कर्मी के रुपये ट्रांसफर में हुई गड़बड़ी
- तमिलनाडु की महिला के खाते में पहुंचे रुपये
- 10 महीने से अपनी रकम के लिए भटक रहा है पीड़ित
- तकनीक पेंच के मामले में है अनोखा मामला, सब झाड़ रहे पल्ला
 
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महिला के खाते में गलती से पहुंचे साढ़े तीन लाख, बोली, ये तो मोदी जी ने दिए
अपने फंड और पेंशन के साढ़े तीन लाख रुपये के लिए सेवानिवृत्त कानपुर नगर निगम का कर्मचारी दस महीने से भटक रहा है। रुपये ट्रांसफर में एक चूक से उसके जीवन भर की कमाई तमिलनाडु की महिला के खाते में चली गई। अब वह महिला कह रही है, मोदी जी ने कहा था खाते में 15 लाख आएंगे, ये तो उसकी पहली किश्त है। अब बैंक और नगर निगम एक-दूसरे की गलती बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। 

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- साल 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे रमेश चंद्र ....
 
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सेवानिवृत्त नगर निगम कर्मी के रुपये ट्रांसफर में हुई गड़बड़ी
नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत रहे रमेश चंद्र 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे। इनका खाता पहले एसबीआई मोतीझील शाखा में था। सेवानिवृत्त के बाद इन्होंने पेंशन के लिए अपना खाता स्वरूप नगर स्थित इलाहाबाद शाखा में ट्रांसफर करवा लिया। इसके बाद इनके खाते में 350380 रुपये ट्रांसफर होने थे। लेकिन इसमें बड़ी चूक हो गई। नगर निगम से भेजी गई डिटेल के मुताबिक मुंबई स्थित एसबीआई के नेशनल ऑटोमेटिक क्लीयरिंग हाउस से दिए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी गई। लेकिन ये रुपये रमेश नहीं बल्कि तमिलनाडु स्थित सनारपत्ती ब्रांच में धनम एस नाम की महिला के खाते में चले गए। रमेश ने जब विभाग और बैंक अफसरों से संपर्क किया तो मामले का खुलासा हुआ। अब बैंक अधिकारी महिला से रुपये वापस मांग रहे हैं पर वह इनकार कर रही है। 
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ऐसे हुई चूक ...
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तमिलनाडु की महिला के खाते में पहुंचे रुपये
नगर निगम से भेजी गई सूचना में रमेश का खाता इलाहाबाद बैंक वाला ही था। नगर निगम के सिस्टम में तकनीक गड़बड़ी के कारण उनका खाता और नाम सही रहा पर माइकर और आईएफएस कोड एसबीआई का चला गया। रमेश और महिला के अकाउंट नंबर भी एक जैसे थे। यहां ध्यान नहीं दिया गया और रकम दूसरे के खाते में चली गई।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- माइनर कोड नहीं मिलाया ...

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10 महीने से अपनी रकम के लिए भटक रहा है पीड़ित
सूत्रों के मुताबिक, भुगतान के समय सभी जानकारी के बाद रुपये ट्रांसफर होते हैं लेकिन क्लीयरिंग हाउस कर्मियों ने अकाउंट नंबर तो देखा पर नाम, माइकर कोड का मिलान किए बगैर ही भुगतान कर दिया।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- जिम्मेदारों के बयान...
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तकनीक पेंच के मामले में है अनोखा मामला, सब झाड़ रहे पल्ला
मामले में शाखा का कोई भी लेना-देना नहीं है। हालांकि पूरा मामला उच्च अफसरों के संज्ञान में ला दिया गया है। बैंक भी चाहता है कि उनका जल्द से जल्द भुगतान हो।
-रोहित कांत मिश्रा, प्रबंधक शाखा परिचालन, एसबीआई मोतीझील 

मामले में बैंकिं ग लोकपाल, एसबीआई, आरबीआई तक में बात की गई है। हालांकि अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है लेकिन विभाग उनका भुगतान करवाएगा। जरूरत पड़ी तो नगर निगम कार्यकारिणी समिति में मामला लाकर भुगतान होगा। 
-रमेश चंद्र निरंजन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम कानपुर
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