आईआईटी कानपुर में रविवार शाम को टेडेक्स (इंटरटेनमेंट टेक्नोलॉजी डिजाइन टाक) शो हुआ। इसमें पहला व्याख्यान साइबर एक्सपर्ट प्रो. संदीप शुक्ला ने दिया। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे तकनीक के प्रयोग में तजी आ रही है, वैसे-वैसे खतरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नोटबंदी से ठीक पहले 3.2 लाख लोगों के डेबिट कार्ड की डिटेल हैक हुई थी। यह तकनीक के दुरुपयोग का नतीजा है। 72 प्रतिशत साइबर अटैक फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनियों पर हो रहे हैं। इसके अलावा कॉगनेटिव डाटा वैज्ञानिक सुकांत खुराना, एंटरप्रिन्योर सुप्रिया पॉल ने भी अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रखी। शो का शुभारंभ आईआईटी कानपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने किया।
सोचने से पहले मस्तिष्क बना लेता रूपरेखा : आलोक वाजपेयी
टेडेक्स को संबोधित करते हुए मनोवैज्ञानिक आलोक वाजपेयी ने इंसान के मस्तिष्क की कार्यशैली बताई। उन्होंने कहा कि इंसान कुछ भी सोचता है, उसके पहले मस्तिष्क उस चीज की पूरी रूप रेखा कहानी के तौर पर तैयार कर लेती है। अब कंप्यूटर साइंस के जरिये यह प्रयास किया जा रहा है कि आदमी के इस मस्तिष्क से ज्यादा तेज किसी रोबोट को तैयार किया जाए।
खेती भी इंजीनियरिंग प्रोडक्ट है : देवी मूर्ति
सोशल इनोवेटर देवी मूर्ति ने ‘आखिर क्यों खेती इंजीनियर्स की समस्या है’ विषय पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने बताया कि आज तकनीक ने हर क्षेत्र को सरल और सहज किया है। ऐसे में जरूरी है कि अपनी तकनीक का सहारा लेते हुए देश की सबसे बड़ी आर्थिक कड़ी यानी एग्रीकल्चर को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि यह भी एक तरह से इंजीनियरिंग प्रोडक्ट ही है।
तकनीक का खेल है मौसम विज्ञान : एसआर रमणन
देश के चर्चित मौसम विज्ञानी एसआर रमणन ने भी आईआईटी टेडेक्स को संबोधित किया। उन्होंने देश और दुनिया में आने वाली प्राकृतिक आपदा, तूफानों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे मौसम विज्ञान तकनीक के सहारे पता करती है कि आगे मौसम कैसा रहेगा।