करीब 15 साल पुराने हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) तरुण कुमार सिंह ने फरमान, उसके भाई सलमान और परविंद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर 2.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। जनपद कांशीरामनगर के नगला ताल मझोला निवासी नवी आलम को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला टिलिया ग्वालटोली निवासी भगवती देवी ने 30 जून 2011 को पुलिस को तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि फरमान, उसका भाई सलमान और परविंद उनके पुत्र संतोष कुमार को बाजार ले जाने के बहाने घर से बुलाकर ले गए थे। संतोष देर शाम तक नहीं लौटा। दो दिन बाद रजीपुर रेलवे ट्रैक के पास एक क्षत-विक्षत शव मिला। संतोष के भाई रामसेवक को अखबार की खबर पढ़कर शव की पहचान का शक हुआ। परिजन ने फोटोग्राफर रामानंद से शव की फोटो देखकर संतोष के रूप में पहचान की। उन्होंने आरोप लगाया कि संतोष की हत्या कर आत्महत्या दिखाने के लिए शव रेलवे ट्रैक पर डाला गया।