पतंजलि के नाम पर जो आसन कराया जाता है, उसे राज योग कह दिया जाता है, जबकि वो तो हठ योग है। हठ योग षट्कर्म, आसन, प्राणायाम, मुद्रा और बंध, इन पांच को मिलाकर होता है। कहने का आश्रय है कि आप गलत योग करेंगे तो उससे शरीर को नुकसान होगा। यह जानकारी रविवार को योग गुरु स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने दी। रविवार को वह कानपुर पहुंचे थे।
बिहार योग विद्यालय, विश्व योग पीठ मुंगेर बिहार की ओर से कान्हा गैलेक्सी हॉल जीटी रोड में 24 से 26 मई तक होने वाले योगोत्सव के बारे में स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने बताया कि योग की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच अनेक स्तरों पर इसकी व्याख्या गलत ढंग से की जा रही है।
हाल यह है कि महर्षि घेरंड और महर्षि स्वात्माराम द्वारा प्रतिपादित योग प्रक्रिया को कई बार महर्षि पतंजलि का बता दिया जाता है। इतना ही नहीं, योग को राज योग और राज योग को हठ योग बताने में भी लोग पीछे नहीं रहते। पतंजलि के नाम पर जो आसन कराया जाता है, उसे राज योग कह दिया जाता है, जबकि वह हठ योग है। हठ योग षट्कर्म, आसन, प्राणायाम, मुद्रा और बंध, इन पांच को मिलाकर होता है। हठ योग में सिद्ध होने के बाद राज योग की बारी आती है। राज योग में हठ योग की प्रक्रिया बदल जाती है।
जीटी रोड में 24 से 26 मई तक होने वाले स्वयं को जानो योगोत्सव 2017 में आने वाले लोगों को प्रसाद स्वरूप रुद्राक्ष की माला, अंग वस्त्र और पुस्तकें भी वितरित की जाएंगी।
शिविर में सुबह 6 से 8 और शाम 6 से 8 बजे तक योग सिखाया जाएगा। योग में 8 साल से अधिक आयु के लड़के-लड़कियां, पुरुष और महिलाएं भाग ले सकते हैं। प्रवेश निशुल्क है। आप को सिर्फ एक आसनी (बैठने वाली) लानी होगी।