औद्योगिक शहर कानपुर में शुक्रवार को देश की नामी आठ कंपनियों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान में कैंपस प्लेसमेंट के जरिये 28 नए नवेले चार्टर्ड एकाउंटेंटों को नौकरी दी। सभी को पांच से नौ लाख रुपये का सालाना पैकेज मिला। खास बात ये रही कि 28 में से आठ चार्टर्ड एकाउंटेंट शहर के ही रहने वाले हैं। इनमें तीन लड़कियां हैं। अच्छे पैकेज पर पहली नौकरी शहर में ही पाकर सभी के चेहरे खिल उठे। सबसे ज्यादा नौ लाख का पैकेज लोहिया कॉर्प ने शहर की सीए गरिमा सिंह को दिया।
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कैंपस प्लेसमेंट के लिए सात राज्यों से 273 नए चार्टर्ड एकाउंटेंटों ने आवेदन किया था। इसमें से इंटरव्यू देने के लिए 159 सीए का चयन हुआ। पहले दिन सिर्फ 70 अभ्यर्थियों ने ही इंटरव्यू दिया। इनमें से 28 को नौकरी मिल गई। सभी अभ्यर्थियों को कंपनियां व्यक्तिगत रूप से सूचित करेंगी। लखनपुर स्थित संस्थान में दो दिन चलने वाले कैंपस प्लेसमेंट में पहले दिन आठ कंपनियां आई थीं। सीयूजीएल शनिवार को इंटरव्यू लेगी।
इन कंपनियों ने दिया प्लेसमेंट
एलआईसी हाउसिंग (मुंबई) ने दो, पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (लखनऊ) ने दो, इंजेक्टोप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड (मुंबई) ने दो, प्रिज्म जॉनसन लिमिटेड (बंगलुरू) ने दो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस लिमिटेड (गुड़गांव) ने तीन, लोहिया कार्प (कानपुर) ने एक, एचसीएल टेक्नोलॉजी (लखनऊ) ने पांच, एमएसकेबी एंड एसोसिएट (गुड़गांव) ने 11 लोगों को जॉब दी।
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गरिमा को सर्वाधिक नौ लाख रुपये का पैकेज मिला।
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में अच्छी संभावनाएं
एलआईसी हाउसिंग के जीएम प्रवीण कुमार, डीजीएम एनके दीक्षित व सीएफओ पी नारायण ने कानपुर में आकर खुशी जताई। उन्होंने कहाकि इस शहर में टैलेंट की कमी नहीं है। इस बार सिर्फ ट्रायल के तौर पर इंटरव्यू लेने आए थे। अभ्यर्थियों ने जिस तरह से जवाब दिया उससे मन खुश है। यहां भविष्य में अच्छी संभावनाएं हैं। सभी अच्छी तैयारी से आए। किसी के अंदर यह भावना नहीं थी कि इंटरव्यू देकर देखते हैं। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया-बोले ‘हम सभी ने तो इंटरव्यू दे देकर चीजें सीखी हैं’। अगली बार यहां ज्यादा वैकेंसी लेकर आएंगे।
सीए पापा की सीए बेटी ने दिखाया जलवा
पनकी के रहने वाले सीए जय प्रकाश सिंह की बेटी सीए गरिमा सिंह ने कैंपस प्लेसमेंट में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया। लखनपुर स्थित सीए संस्थान में शुक्रवार को हुए 28 प्लेसमेंट में से गरिमा को सर्वाधिक नौ लाख रुपये का पैकेज मिला। उन्हें शहर की दिग्गज कंपनी लोहिया कार्प ने शहर में ही नौकरी दी है। गरिमा अपनी इस सफलता से बेहद खुश हैं। गरिमा के बड़े भाई वैभव सिंह भी सीए हैं, लेकिन उन्होंने गरिमा के साथ ही सीए की परीक्षा पास की। वैभव पिता की फर्म में ही प्रैक्टिस कर रहे हैं।
गरिमा बताती हैं कि सीए बनने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से ही मिली। वे प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने अपनी फर्म में जॉब के लिए ऑफर किया था लेकिन खुद को साबित करने के लिए घर की ही फर्म में काम करना रास नहीं आया। गरिमा बताती हैं कि फिलहाल कुछ समय तक वे नौकरी करेंगी। इसके बाद तय करेंगी कि प्रैक्टिस में जाना है या नौकरी ही करनी है। बीते दो साल से शहर में ही हो रहे प्लेसमेंट की वजह से शहर के युवाओं के लिए अवसर के द्वार खुले हैं। इससे शहर की साख तो बढ़ती ही है। पढ़े लिखे युवा को शहर से पलायन नहीं करना पड़ता। इस प्रयास के लिए वे सीए संस्थान के पदाधिकारियों को धन्यवाद देती हैं।
प्लेसमेंट इसलिए महत्वपूर्ण
दि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया का रीजनल ऑफिस कानपुर में है। इस संस्थान पर सात राज्यों की जिम्मेदारी है। हर साल सैकड़ों छात्र-छात्राएं सीए बनकर निकलते हैं। औद्योगिक व व्यापारिक शहर होने के बावजूद शहर में नौकरी नहीं मिलती थी। यहां काम करने के लिए निजी प्रैक्टिस ही एकमात्र विकल्प था। इस बार आठ कंपनियों के आने से सीए की पढ़ाई कर चुके युवाओं के लिए राह आसान हुई है।
चौथी बार गिरा ग्राफ
सीए संस्थान की ओर से शहर में यह चौथा कैंपस प्लेसमेंट था। हर छह माह में होने वाले प्लेसमेंट में इस बार कम कंपनियों ने रुचि दिखाई। गत फरवरी में हुए प्लेसमेंट में 16 कंपनियां आई थीं। सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के पूर्व चेयरमैन दीपकुमार मिश्र का कहना है कि कंपनियां भले ही कम आई हों लेकिन प्लेसमेंट ठीकठाक हुआ है। आगे और अच्छा प्रयास किया जाएगा।
कंपनियों ने बदला चयन का पैमाना
लोहिया कॉर्प के सीए अनुपम अग्रवाल बताते हैं कि कैंपस प्लेसमेंट में चयन का पैमाना अब बदल गया है। नौकरी पाने का आधार सिर्फ विषय की काबिलियत नहीं होती। जो अभ्यर्थी सामने बैठा है उसने बहुत कठिन पढ़ाई पढ़ी है। यानी उसे एकाउंटेंसी तो आती ही है। अब जमाना बहुमुखी प्रतिभा के धनी लोगों का है। यानी कंपनी के लिए वह अभ्यर्थी ज्यादा काम का है जो एकाउंटेंसी के अलावा कंपनी की जरूरतों को भी समझता है। इसलिए इंटरव्यू देने से पहले अभ्यर्थियों को अपने विषय पर ही फोकस नहीं रखना चाहिए।