कानपुर। घाटमपुर के रेउना क्षेत्र के गांव में साइबर अपराध से जुड़े कई आरोपी नौकरी करने की बात कहकर ठगी का खेल में शामिल थे। वह सुबह अपने साथ टिफिन लेकर काम पर जाने की बात कहकर निकलते और शाम को बाजार से फल और सब्जी लेकर लौटते थे। गिरोह ने बचने के लिए फुल प्रूफ तैयारी की थी। की-पैड मोबाइल से पांच-पांच के समूह में लोगों को कॉल कर शिकार बनाया जाता था। यह जानकारी पुलिस को आरोपियों से पूछताछ में हासिल हुई है। साइबर क्राइम ब्रांच, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और पुलिस फरार शातिरों की तलाश कर रही है।
रेउना क्षेत्र में साइबर क्राइम ब्रांच, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और पुलिस ने ड्रोन की मदद से छापेमारी कर साइबर अपराध करने के आरोप में 20 लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि 14 फरार हो गए थे। इस कार्रवाई में 20 चार पहिया और 50 दो पहिया वाहनों से 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हुए थे। एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि गिरोह भले ही पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन उनका तरीका काफी शातिर था। उनकी सारी कॉल की-पैड मोबाइल से होती थी, जबकि एंड्राइड फोन से पुलिस का सायरन बजाने का कार्य किया जाता था। आरोपी छोटे-छोटे समूह में अलग अलग खेतों में बैठकर कॉल किया करते थे। उनकी सुरक्षा के लिए खेतों के रास्ते में किशोर, बच्चे और बुजुर्गों की ड्यूटी लगाई जाती थी। यह सूचनाएं देने का काम करते थे। अगर कोई नया व्यक्ति या कार आती थी तो तुरंत इसकी जानकारी टीम को देते थे। गिरोह में शामिल शैलेंद्र का इतिहास खंगाला जा रहा हे। वह चेन्नई और महाराष्ट्र के गैंग में लंबे समय तक शामिल था। उसने ही गांव से कई युवकों को वहां बुलाया था और इसी तरह का कार्य शुरू कर दिया। वहां की पुलिस की दबिश में आरोपी भागकर गांव में आ गए।
एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़े आरोपियों की संख्या काफी अधिक है। इन लोगों ने ए, बी, सी, डी...एल्फाबेट से अपनी टीम के नाम रखे हुए थे। एक टीम दूसरे को संदेश भेजती थी। अगर कोई दिक्कत होती थी तो तुरंत बैकअप में गांव के अन्य लड़कों को आने के लिए कहा जाता था। आरोपियों के पास मिले मोबाइल सिम फर्जी दस्तावेजों से हासिल किए गए हैं। पुलिस को कई बैंक खाते भी मिले हैं। यह म्यूल अकाउंट होंगे। आरोपियों ने दूसरे के नाम पर खुलवाए हैं।
आरोपी अधिकारियों के हाव-भाव, उनका स्टाइल, बोलने और निर्देश देने का तरीका अच्छी तरह से देखा करते थे। इसके लिए समाधान दिवस, थाना दिवस, तहसील और अन्य जगहों पर जाया करते थे। कई बार गुपचुप तरीके से थाने गए और अपराध की जानकारी जुटाई। कॉल करने पर दूसरी ओर से कोई जानकार बात करने लगता था तो बातचीत की जिम्मेदारी दूसरा संभाल लेता था। इसी तरह से अन्य विभागों की जानकारी हासिल करते थे। सरकारी योजनाओं, उसमें लगने वाले दस्तावेज, बैंक में केवाईसी फॉर्म, ओटीपी आदि की जानकारी रखते थे। इतना ही नहीं आरोपियों ने अपने मोबाइल में विभिन्न पेमेंट बैंक के एप डाउनलोड कर रखे थे, जिसमें बारकोड के सहारे रकम मंगवाया करते थे। इन एप में केवाईसी की आवश्कता नहीं पड़ती थी। आरोपियों
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26 बैंक खातों में मिले दस लाख रुपये
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपियों के कई खाते मिले हैं, जिनमें से 26 में लगभग 10 लाख रुपये थे। रकम को फ्रीज कराया गया है। यह बैंक खाते अलग अलग बैंकों में है। और जानकारी जुटाई जा रही है।
- रेउना के यूपी ग्रामीण बैंक में रोहित सिंह के खाते में 4.44 लाख रुपये।
- रेउना के यूपी ग्रामीण बैंक में पुष्पेंद्र के खाते में 2.85 लाख रुपये।
- बहलामऊ के यूपी ग्रामीण बैंक में किशन सिंह के खाते में 5.17 लाख रुपये।
- रठिगांव के यूपी ग्रामीण बैंक में करन के खाते में 52 हजार रुपये।
- गुजैनी के यूपी ग्रामीण बैंक में राजा सिंह के खाते में 48 हजार रुपये।
- पंजाब नेशनल बैंक में रमेश के खाते में 6 लाख रुपये।
- पंजाब नेशनल बैंक में रोहित सिंह के खाते में छह लाख रुपये।
बिधनू, घाटमपुर, मूसानगर में लिए प्लॉट
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरोह में शामिल आरोपी अपने पास ज्यादा रुपये नहीं लेते थे। उन रुपयों को प्लॉट, दुकान और लोडर खरीदने में लगाते थे। पुलिस को बिधनू, घाटमपुर, मूसानगर, गजनेर, नौबस्ता में भी प्लॉट खरीदने की जानकारी हुई है। पुलिस शुक्रवार को कुछ और बैंकों से डिटेल हासिल करेगी।