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डायबिटीज कम उम्र में ही पैर के पंजे कर दे रही सुन्न, आंतों की चाल में भी आ रही गड़बड़ी

Tue, 05 Mar 2019 11:31 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक फोटो
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डायबिटीज के लक्षण और गंभीर हो रहे हैं। यह रोग कम उम्र के मरीजों के नर्वस सिस्टम और नसों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कानपुर के हैलट अस्पताल की डायबिटीज क्लीनिक में इलाज करा रहे 22 साल के विमल ने बताया कि उन्हें पैर के पंजों में किसी पत्थर के गड़ने का अहसास नहीं होता। इसके साथ ही तेज झटके के साथ चलने में गिर जाते हैं। क्लीनिक प्रभारी डॉ. सौरभ अग्रवाल ने उसकी जांच की तो पता चला कि रोगी को अपने मर्ज की जानकारी डायबिटिक न्यूरोपैथी होने के बाद हुई।
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चौंकाने वाली बात यह है कि डायबिटीज के रोगियों में अब न्यूरोपैथी की दिक्कत जल्दी हो रही है। बिगड़ी लाइफ स्टाइल, खानपान और प्रदूषण का माहौल रोग के लक्षणों को अधिक गंभीर बना दे रहा है। स्थिति के मद्देनजर डायबिटीज के कारणों को और गहराई से जानने के लिए मेडिकल कॉलेज की एथिक्स कमेटी ने प्रोजेक्ट पास किया है। प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया में पंजीकृत करा दिया गया है। इसमें रोगियों के शरीर में मैग्नीशियम और फास्फोरस की मात्रा को डायबिटीज से जोड़कर देखा जाएगा।
 
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हैलट की डायबिटीज क्लीनिक में औसतन रोजाना 320 मरीज आते हैं। इनमें 100 रोगी डायबिटिक न्यूरोपैथी की गिरफ्त में हैं। इनके अध्ययन में पाया गया कि हाई ब्लड शुगर से नर्वस और नसें तो प्रभावित हैं ही, इन्हें बीच-बीच में डायरिया हो जाता है। पेट में भारीपन और दर्द रहता है। मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। ऐसे रोगियों का आयु वर्ग 30 साल से 55 साल के बीच है। डायबिटिक न्यूरोपैथी से लाइफ क्वालिटी प्रभावित न हो, इसके लिए रोगियों को ‘सजेशन प्लान’ दिया जा रहा है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी कम उम्र के रोगियों को भी हो जा रही है। इसका प्रभाव पूरे शरीर पर आ रहा है। ऑटोनोमस न्यूरोपैथी में रोगी को अचानक हार्ट अटैक पड़ सकता है। हार्ट रेट कम हो जाती है और ब्लडप्रेशर नीचे आ जाता है। इस पर और बारीकी से अध्ययन के लिए शोध किया जाएगा। इसके साथ ही रोगियों को विशेष एहतियात बताए जा रहे हैं। 
- डॉ. सौरभ अग्रवाल, डायबिटीज विशेषज्ञ, मेडिसिन विभाग


लक्षण
पैरों में जलन, सुन्न होना, दर्द होना, बिना दर्द के घाव हो जाना, चलनेे, उठने-बैठने में दर्द होना, हाथ-पैर झनझनाहट होना वगैरह।

एहतियात
ब्लड शुगर नियंत्रित रखें। विटामिन लेते रहें। पैरों की देखभाल करें, नंगे पैर न चलें। सोने के पहले गुनगुने पानी से पैर धोएं, उंगलियों और पैर में क्रीम आदि लगाएं।
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