हैलट की डायबिटीज क्लीनिक में औसतन रोजाना 320 मरीज आते हैं। इनमें 100 रोगी डायबिटिक न्यूरोपैथी की गिरफ्त में हैं। इनके अध्ययन में पाया गया कि हाई ब्लड शुगर से नर्वस और नसें तो प्रभावित हैं ही, इन्हें बीच-बीच में डायरिया हो जाता है। पेट में भारीपन और दर्द रहता है। मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। ऐसे रोगियों का आयु वर्ग 30 साल से 55 साल के बीच है। डायबिटिक न्यूरोपैथी से लाइफ क्वालिटी प्रभावित न हो, इसके लिए रोगियों को ‘सजेशन प्लान’ दिया जा रहा है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी कम उम्र के रोगियों को भी हो जा रही है। इसका प्रभाव पूरे शरीर पर आ रहा है। ऑटोनोमस न्यूरोपैथी में रोगी को अचानक हार्ट अटैक पड़ सकता है। हार्ट रेट कम हो जाती है और ब्लडप्रेशर नीचे आ जाता है। इस पर और बारीकी से अध्ययन के लिए शोध किया जाएगा। इसके साथ ही रोगियों को विशेष एहतियात बताए जा रहे हैं।
- डॉ. सौरभ अग्रवाल, डायबिटीज विशेषज्ञ, मेडिसिन विभाग
लक्षण
पैरों में जलन, सुन्न होना, दर्द होना, बिना दर्द के घाव हो जाना, चलनेे, उठने-बैठने में दर्द होना, हाथ-पैर झनझनाहट होना वगैरह।
एहतियात
ब्लड शुगर नियंत्रित रखें। विटामिन लेते रहें। पैरों की देखभाल करें, नंगे पैर न चलें। सोने के पहले गुनगुने पानी से पैर धोएं, उंगलियों और पैर में क्रीम आदि लगाएं।