नालों पर हुआ अतिक्रमण बना जलभराव का कारण
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कानपुर। मलेरिया की रोकथाम के लिए मच्छर मारने में इस्तेमाल होने वाला मैलाथियान पाउडर लखनऊ में स्थापित प्रयोगशाला की जांच में फेल हो गया है। स्वास्थ्य महानिदेशालय अब दूसरी कंपनी से मैलाथियान खरीदने की तैयारी कर रहा है। तब तक मच्छरों को मारने का विभाग के पास कोई प्लान नहीं है। मलेरिया विभाग मच्छरों की जगह लार्वीसाइडल से उनके अंडों को मारने की तैयारी में है। लगातार तीन साल तक डीडीटी के छिड़काव के बाद भी मच्छरों की संख्या कम न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने इस साल से मैलाथियान के छिड़काव का निर्णय लिया था। लखनऊ से सभी जिलों को बजट भी जारी कर दिया गया है। कानपुर को आठ लाख रुपये मिले हैं। पिछले हफ्ते मैलाथियान का नमूना फेल हो गया तो सप्लाई पर रोक लगा दी गई। वहीं डीडीटी पहले से खत्म है। अब मच्छर तो मार नहीं सकेंगे, लिहाजा लार्वीसाइडल (टेमीफास अबेट) के छिड़काव से उनके अंड खत्म करने की योजना बनी है।
ब्लॉक नमूने पॉजिटिव
कल्याणपुर 2324 0
बिधनू 2471 0
सरसौल 5694 10
चौबेपुर 1273 0
शिवराजपुर 1991 7
बिल्हौर 3076 0
ककवन 1545 1
पतारा 2399 0
घाटमपुर 2555 5
शहरी क्षेत्र 7285 0
मलेरिया बढ़ रहा, कागजों में मरीज ही नहीं
मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं, लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में मलेरिया इक्का-दुक्का जगहों पर फैला है। कई ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग को इस साल अब तक एक भी मलेरिया पॉजिटिव नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग के इन आंकड़ों के बीच मंगलवार को हैलट और उर्सला में 35 से ज्यादा मलेरिया पॉजिटिव मरीज पहुंचे हैं। इनमें से कुछ को भर्ती करना पड़ा।