कानपुर। शहर में करीब सवा लाख आवारा कुत्ते हैं लेकिन नगर निगम राेजाना 60 कुत्तों की ही नसबंदी करा पाता है। किशनपुर में आवारा कुत्तों के लिए एक महीने पहले शेल्टर होम भी बनवाया गया है। इसकी क्षमता डेढ़ सौ कुत्तों को रखने की है। यहां 40 कटखने कुत्ते हैं। वहीं कुत्तों के काटने के बड़े पैमाने पर आ रहे मामलों की वजह से सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज लगवाने वालों की संख्या बढ़ गई है।
नगर निगम ने आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के उद्देश्य से पांच साल पहले फूलबाग में एसीबी सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) शुरू किया था। यहां रोजाना औसतन 40 आवारा कुत्तों की नसबंदी होती है। दूसरा अस्पताल किशनपुर में बनाया गया। पिछले महीने शुरू हुए इस नवनिर्मित सेंटर में रोजाना औसतन 20 आवारा कुत्तों की नसबंदी होती है। शासन के आदेश के अनुसार नगर निगम आवारा कुत्तों को जहां से पकड़ता है, नसबंदी के बाद चौथे दिन वहीं छोड़ता है। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और एनसीआर नगर निगम को आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, एनसीआर के लिए आदेश दिया है। न्यायालय या शासन यहां के लिए जो निर्देश देगा, उसका पालन किया जाएगा। - डॉ. आरके निरंजन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी नगर निगम
एबीसी सेंटर में आवारा कुत्तों की नसबंदी करते समय उनके दाहिने कान में वी-आकार का कट लगाया जाता है। इससे इनके नसबंदी होने या न होने का पता किया जा सकता है।