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कानपुर: रिश्वत लेने के आरोपी औरैया के तत्कालीन एडीपीआरओ बरी, कोर्ट ने सबूतों के अभाव में किया दोषमुक्त

Wed, 14 Oct 2026 08:39 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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बीस हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में फंसे औरैया के तत्कालीन सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी (एडीपीआरओ) कमल किशोर को सबूतों के अभाव में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। शिकायत दर्ज कराने वाला गांव का प्रधान रामविलास ही कोर्ट में बयान से मुकर गया था। इस पर कोर्ट ने प्रधान के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश भी दिया है।
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औरैया के बेला थाना क्षेत्र के पट्टी तोरना गांव के प्रधान रामविलास ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव में विकास कार्यों के लिए जेई के इस्टीमेट तैयार करने के बाद उसकी वित्तीय स्वीकृति के लिए फाइल एडीपीआरओ के पास भेजी गई थी। आरोप था कि सहारनपुर के पैईरागपुर निवासी एडीपीआरओ कमल किशोर स्वीकृति के लिए चार प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे। 20 हजार रुपये एडवांस मांगे थे। इस पर प्रधान ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के लखनऊ मुख्यालय में शिकायत की।

गोपनीय जांच कराई गई और 10 जनवरी 2019 को आई रिपोर्ट के आधार पर अगले दिन कमल के घर पर जाल बिछाकर उन्हें 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने का दावा किया गया था। मुकदमे में अभियोजन की ओर से रामविलास समेत 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। शिकायतकर्ता व चश्मदीद गवाह भी कोर्ट में बयान से मुकर गए। कोई ठोस सबूत न होने पर कोर्ट ने कमल किशोर को बरी कर दिया।
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प्रधान बोला, मैं एडीपीआरओ से कभी नहीं मिला
गवाही के दौरान शिकायतकर्ता प्रधान रामविलास ने कहा कि उसने कोई शिकायत नहीं की थी। प्रधान की सीट आरक्षित कोटे से अनुसूचित जाति की थी। चुनाव जीतने में उच्च जाति के संदीप कुमार तिवारी ने मदद की थी इसलिए प्रधान बनने के बाद सारा काम प्रधान प्रतिनिधि के रूप में संदीप ही देखते थे। बोले, जिस निर्माण कार्य के लिए रिश्वत लेने की बात कही जा रही है उस निर्माण कार्य का कोई प्रस्ताव ही नहीं था। न तो उनकी कभी कोई मुलाकात तत्कालीन एडीपीआरओ कमल किशोर से हुई और न ही वो उन्हें जानता है। शिकायती पत्र में संदीप की लिखावट है और उसी का मोबाइल नंबर भी लिखा है।

 
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सरकारी कर्मचारी भी बयान से पलटे
दो स्वतंत्र गवाह भी कोर्ट में पेश किए गए लेेकिन उन्होंने भी कमल को रिश्वत लेते देखने से इन्कार किया। घटना के समय औरैया के ग्राम विकास अधिकारी रहे मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि जिस निर्माण के लिए रिश्वत की बात कही जा रही है उसका कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था। प्रस्ताव पर बने हस्ताक्षर को भी वीडीओ ने उसका होने से इन्कार किया। इस पर उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया था। घटना के समय औरैया के डीएम कार्यालय में तैनात रहे डीएलआरसी राजेश कुमार ने बयान में कहा था कि जब टीम लिखापढ़ी कर रही थी तब वह मौजूद था लेकिन रिश्वत लेते पकड़े जाते समय वह मौजूद नहीं था।
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