कानपुर देहात/रूरा। अंबरपुर स्थित पानी की टंकी पर काम करने आए दो किशोर श्रमिकों की पढ़ाई से एक साथ सफर शुरू हुआ था। आर्थिक तंगी दूर करने के लिए मजदूरी शुरू करने के 12 दिन बाद उन्हें मौत भी जुदा न कर सकी। दो घरों के चिराग बुझ जाने से बिलख रहे परिजन को देख हर एक की आंख नम हो गई।
दिव्यांशु की मौत पर उसके पिता जगदीश, मां मिथलेश देवी, भाई प्रियांशु, लवकुश व हिमांशु रो-रोकर बेहाल रहे। वहीं शादाब की मौत पर दिव्यांग पिता तकदीर, मां गुड्डी, दादी शहीदन निशा, ताऊ हरिशाह, भाई महताब, बहन रुखसार, मुस्कान, साजिदा भी रोते बिलखते हुए रूरा थाना पहुंची। जगदीश ने बताया कि पहले वह राजमिस्त्री का काम करते थे। इटावा में काम करने के दौरान मिले एक इंजीनियर ने उन्हें पाइप फिटिंग का काम सिखा दिया था। इस काम में अच्छा रुपया मिलने पर उसने राजमिस्त्री के साथ जल जीवन मिशन से बनने वाली पानी की टंकियों में पाइप फिटिंग का काम शुरू कर दिया था।
बेटे दिव्यांशु व रूमा निवासी शादाब दोनों घनिष्ट मित्र थे। दोनों एक साथ रूमा स्थित एक विद्यालय में कक्षा आठ के छात्र थे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते बेटा दिव्यांशु गर्मी की छुट्टी होने के चलते उसके साथ आया था। इस दौरान बेटा शादाब को भी अपने साथ लाया था। यहां वह उनकी देखरेख बच्चों की तरह करता था, उनपर नजर भी रखता था। बकरीद होने के चलते बृहस्पतिवार को काम न होने पर उन्होंने बड़े बेटे प्रियांशु को चौबेपुर सामान लेने भेज दिया था और स्वयं कानपुर चला गया था। वहां से लौटने पर बच्चों की मौत की जानकारी मिली।
वहीं, तकदीर ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आठ माह पहले रामादेवी कानपुर नगर में मजदूरी के दौरान छत ढह जाने से वह मलबे में दबकर दिव्यांग हो गए थे। घर का बड़ा बेटा होने के नाते शादाब ने गांव में बाइक मरम्मत का काम शुरू किया था। कुछ दिन पहले वह अपने दोस्त के साथ मजदूरी करने आया था। बेटे की मौत से उसके घर का सहारा छिन गया।
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बिना सुरक्षा के डेथ ट्रैप में फंस गए दिव्यांशु व शादाब
करीब 18 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से शादाब व दिव्यांशु की मौत की खबर पर मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने बताया कि खेत गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर होने के चलते यहां लोगों का आना जाना कम था। खेत मालिक ने करीब एक साल पहले खेत में नलकूप व फार्महाउस बनवाने के दौरान खेत में गड्ढा बनाया था। इसके बाद इसमें पानी भरवा दिया था। महज देखने मात्र से गड्ढे की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था। कहीं न कहीं दोनों किशोरों की मौत के पीछे यही कारण रहा। वह सही से गड्ढे की गहराई का अनुमान नहीं लगा सके और नहाने के लिए छलांग लगा दी। इसके अलावा गड्ढे के आसपास कोई सुरक्षा की व्यवस्था व संकेतक भी नहीं लगा था। वहीं दिव्यांशु के पिता जगदीश ने बताया कि दोनों बच्चे तैरना नहीं जानते थे।