अभियोजन ने पीड़िता समेत पांच गवाह पेश किए
रिपोर्ट में यह भी कहा कि गुप्तांग में कोई चीज भी डाल दी। दर्द से बेहोश होने पर शिवमंगल फरार हो गया था। पुलिस ने शिवमंगल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और चार्जशीट कोर्ट भेज दी गई। मुकदमे में अभियोजन की ओर से पीड़िता समेत पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए।
जेल भेजने के लिए दर्ज करवाई झूठी रिपोर्ट
यहां पीड़िता ने बयान में कहा कि 13 साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी थी। उसके चार बच्चे भी हैं। शिवमंगल उसकी बड़ी बेटी से शादी करना चाहता था। पीड़िता के भाइयों ने बेटी की शादी दूसरी जगह कर दी और शिवमंगल को जेल भेजने के लिए पीड़िता से झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
साढ़े तीन साल से जेल में रहा बेकसूर
शिवमंगल ने कोई गलत काम नहीं किया। भाइयों के कहने पर झूठी रिपोर्ट लिखाई। शिवमंगल साढ़े तीन साल से जेल में बंद है। गरीबी के कारण वह मुकदमा लड़ने के लिए वकील तक नहीं कर सका जिस पर अदालत ने उसकी पैरवी के लिए न्यायमित्र मधु अवस्थी को नियुक्त किया था।
झूठी गवाही पर पीड़ित के खिलाफ मुकदमा
मधु ने शिवमंगल की ओर से कोर्ट में झूठा फंसाए जाने की बात कही। तर्क रखा कि पीड़िता का मेडिकल भी 17 दिन बाद हुआ था और इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने बयान हुए हैं। घटना का कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने शिवमंगल को बरी कर दिया। झूठी गवाही देने पर पीड़िता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश कर दिए।
अदालत में पेशी पर आए शिवमंगल का दर्द सुना और बेकसूर को इंसाफ दिलाने के लिए कोर्ट में मजबूत पैरवी की। घटना का सच कोर्ट के सामने आने पर शिवमंगल, तो बरी हुआ ही अब पीड़ित बनकर बेकसूर को जेल भिजवाने वाली महिला को भी सजा भुगतनी होगी। -मधु अवस्थी, न्याय मित्र