पूरी दुनिया की निगाहें इसरो के जिस चंद्रयान-2 मिशन पर हैं, उसका अहम हिस्सा कानपुर के विनोद कुमार श्रीवास्तव भी रहे हैं। 22 जुलाई को जब चंद्रयान-2 मिशन चांद पर भेजा गया था तो विनोद ने दूरदर्शन पर लाइव कमेंट्री की थी, जिसे पूरी दुनिया ने सुना था। इससे पहले भी वह लगातार छह बार ऐसे बड़े मिशनों का आंखों देखा हाल सुना चुके हैं।
37 साल तक इसरो में विभिन्न पदों पर काम करने वाले आर्यनगर निवासी विनोद शनिवार को घर लौट आए हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 ने दुनिया में इतिहास रच दिया है। बोले, लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने का मतलब यह नहीं है कि चंद्रयान-2 मिशन ही फेल हो गया है। लैंडर विक्रम इस मिशन का एक हिस्सा था।
विनोद ने बताया कि 1982 में इसरो ज्वॉइन किया था। इसके बाद सभी अहम मिशन का हिस्सा रहे। उन्होंने ही इसरो का पहला रॉकेट सेफ्टी डिवीजन तैयार किया। 2011 में जब वह इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर (एसडीएससी) में रेंज सेफ्टी ऑफिसर के महाप्रबंधक पद से रिटायर हुए तो इसरो ने कार्यकाल बढ़ाते हुए उन्हें साइंटिफिक एडवाइजर के पद पर तीन साल की जिम्मेदारी दी।
2015 में कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें स्पेस मिशन की लॉन्चिंग रिव्यू टीम का सदस्य बनाया गया था। अब भी वह टीम के सदस्य हैं। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में उन्हें विशेष अनुरोध पर आमंत्रित किया गया था।