रसूलाबाद। पांडु नदी का जलस्तर रविवार को करीब छह इंच घटा है। हालांकि अभी नदी किनारे खेतों में जलभराव से फसलें जलमग्न हैं। इधर कई गांवों के रास्ते जलमग्न हैं। इससे आवाजाही में परेशानी हो रही है। लोगों को जहरीले कीड़ों का डर भी सता रहा है।
बीते दिनों हुई अतिवृष्टि से पांडु नदी जलस्तर बढ़ने से कुर्सी खेड़ा, कृष्ण दत्त निवादा, रामनगर, दलिकपुर महाराजपुर, खरकपुर, सुक्खा निवादा, भग्गा निवादा व तोरना समेत 15 गांवों में फसलें जलमग्न हैं। कई रास्तों पर अभी पानी भरा है। कई दिन तक नदी जल लगभग स्थिर बना रहा। रविवार को करीब छह इंच पानी कम हुआ है। हालांकि कई रास्तों पर जलभराव है।
इधर, फसलें डूबी होने से किसानों की चिंताएं बनी है। भीतरगांव निवासी श्याम कुमार का कहना है कि करीब 10 बीघा धान की फसल डूबी है। इसी गांव के सत्येंद्र सिंह ने बताया कि छह बीघा धान की फसल बर्बाद होने की कगार पर है। रामकुमार का कहना है कि करीब छह बीघा धान की फसल डूबी है। वहीं राकेश पांडेय ने बताया कि करीब 30 बीघा धान की फसल डूबी है। इसी प्रकार भग्गा निवासी निवासी सोबरन सिंह ने बताया कि सात बीघा धान की फसल जलमग्न है। पुष्पा देवी का कहना है कि करीब 12 बीघा और जयचंद्र का कहना है कि करीब छह बीघा फसल पानी में डूबने से बर्बाद होने के कगार पर है। रामस्वरूप नागर ने बताया कि करीब तीन बीघा धान की फसल में पानी भरा है।
वहीं, भग्गा निवादा निवासी रघुराज सिंह ने बताया कि पशुओं के चारे के लिए सुक्खा निवादा रामनगर के किसानों से भूसा उधार लेना पड़ा है। भीटी कुर्सी, भग्गा निवादा वाया रामनगर होते हुए कानपुर नगर जाने रास्ते पर पानी भरा है। ऐसे में किसान व व्यापारी कानपुर या कन्नौज सामान लेने नहीं जा पा रहे हैं। जानवरों को खिलाने के लिए चोकर भी नहीं आ रहा है। इससे पशुपालन की चुनौती बनी है। एसडीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि जिन स्थानों पर नदी का पानी उतर गया है वहां सर्वे कराया जा रहा है। शीघ्र ही किसानों को हुई फसल क्षति के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।