रनियां। खानचंद्रपुर में लगे पुराने हरे पेड़ों में समाहित क्रोमियम का पता लगाने के लिए आईआईटी दिल्ली और जर्मन यूनिवर्सिटी की पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम तनों व जड़ के नमूने ले रही है। टीम ने बुधवार को दूसरे दिन तनों व जड़ों से 22 नमूने संकलित किए। दो दिन में 47 नमूने लिए गए हैं। 300 नमूने लेने का लक्ष्य है। पानी के नमूने भी टीम लेगी।
खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग पर 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप था। जो वहां के भूजल में घुल गया है। पिछले एक साल में 85 हजार मीट्रिक हजार टन कचरा उठाकर निस्तारित कर दिया गया है। अब केवल 10 हजार मीट्रिक टन पड़ा है। आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार गुप्ता व उनकी टीम इस क्षेत्र में ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से रिचर्स कर रही है। 60 फीट गहरी बोरिंग में ई-माइक्रोबायोम ट्रीटमेंट के बाद पानी पीने योग्य पाया गया है।
क्रोमियम से प्रभावित एरिया को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए आईआईटी दिल्ली व जर्मनी के जेना स्थित फैंडरिच सिचलर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रोफेसर थास्टन, डॉ. मार्कस व सहयोगी कैलोरील तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन बुधवार को खानचंद्रपुर पहुंचे। मजरा यादवपुरवा में 22 हरे पेड़ो के तना व जड़ों से कोर उपरकण के जरिये सैंपल लिए। डॉ. मार्कस ने बताया कि बारिश में भूगर्भ में घुला क्रोमियम पेड़ों की जड़ों से होकर पूरे पेड़ में जज्ब (समाहित) हुआ है। नमूनों की जांच से क्रोमियम की हकीकत सामने आएगी। पेड़ों से नमूने लेने के बाद गुरुवार को पानी के नमूने लिए जाएंगे।
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आईआईटी दिल्ली के रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में ड्रोन कैमरे के जरिये डंप एरिया के तीन किलोमीटर की दूरी तक पेड़ों की गिनती कराई गई। इसमें पुराने 300 पेड़ों को चिह्नित किया गया। अब इन पेड़ों से नमूने लेकर यह पता लगाया जा रहा है कि पेड़ों में क्रोमियम की मात्रा है या नहीं।
दिल्ली आईआईटी व जर्मनी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम खानचंद्रपुर में पुराने पेड़ों के तनों व जड़ का नमूना लेकर क्रोमियम की जांच करेंगी। भूजल में घुले क्रोमियम की जांच के लिए बोरिंग भी विकल्प है, लेकिन बोरिंग में खर्च अधिक आता है। इसकी वजह से तनों व जड़ों के नमूनों को जांच के लिए संकलित किया जा रहा है। करीब 4 माह में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल एनजीटी के सर्वे में जुही राखी मंडी कानपुर सहित कानपुर देहात के खानचंद्रपुर और फतेहपुर के रेलवे किनारे के तीन गांवों में जमीन के नीचे की मिट्टी और भूजल में हानिकारक क्रोमियम मिलने के बाद इसका निराकरण करने के लिए शासन स्तर से एक टीम गठित की गई है। जिसका अध्यक्ष मंडलायुक्त कानपुर के विजयेंद्र पांडियन व सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल मिश्रा को बनाया गया है। यह टीम सात मार्च को अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव पर्यावरण को सौपेगी।
टीम के माध्यम से इन सभी स्थानों पर रहने वालों को स्वच्छ पेयजल और वहां फैले हानिकारक क्रोमियम से बचाने के उपाय किए जाएंगे। इसी कड़ी में एक दिन पहले मंडलायुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों की बैठक कर दिशा निर्देश दिया था।