कानपुर। रेलवे प्रशासन की ओर से दिवाली पर यात्रियों की भीड़ को मैनेज करने के लिए की गईं व्यवस्थाएं शनिवार को सेंट्रल स्टेशन में डिरेल हो गई। बिहार की ओर से आने वाली ट्रेनों में दिव्यांग कोच से लेकर शौचालयों तक में लोग बैठकर घरों के लिए गए। सीट आरक्षित होने के बाद भी कई यात्रियों को सीट नहीं मिल सकी।
दिल्ली से वैशाली बिहार की ओर से जाने वाली वैशाली एक्सप्रेस शनिवार दोपहर जैसे ही सेंट्रल पर पहुंची तो बिहार, गोरखपुर की ओर जाने वाले यात्रियों को घुसने की जगह नहीं मिली। कुछ यात्री लड़ाई-झगड़ा करके ट्रेन के अंदर घुसे। इसके बाद बैठने की जगह नहीं मिली। कोच में खड़े होने को लेकर भी झगड़े होते देखते गए। दिल्ली से गोरखपुर जा रहे सिकंदर कुमार ने बताया कि उनकी सीट आरक्षित थी लेकिन उनकी सीट पर चार यात्री बैठे थे। उठने के लिए कहा तो वह झगड़े पर उतारू हो गए।
उन्होंने बताया कि पुलिस से शिकायत की लेकिन पुलिस भी सीट तक नहीं पहुंच पाई। जमीन पर बैठकर ही कानपुर तक आए। इसी तरह आम्रपाली एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस, जोगबनी एक्सप्रेस, आगरा इंटरसिटी समेत अन्य ट्रेनों में स्लीपर से लेकर जनरल कोच यात्रियों की भीड़ से ठसाठस भरे दिखाई दिए।
दिल्ली, बिहार, मुंबई और गुजरात रूट की ट्रेनें जैसे ही सेंट्रल स्टेशन पर रुकी तो यात्री इमरजेंसी दरवाजे खोलकर अंदर घुसे। इस दौरान कई यात्रियों की शर्ट फट गई तो कोई चोटें आ गईं। सेंट्रल स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी के जवान दिखाई दिए लेकिन भीड़ के आगे वह भी बेबस दिखे।
सप्ताह के अंतिम दिन घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी है। 726 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ाएंगे। -अमित सिंह, जनसंपर्क अधिकारी प्रयागराज मंडल