कानपुर। भारत-यूके मुक्त व्यापार (एफटीए) समझौते से शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों को शुक्रवार को निराशा हाथ लगी। शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेज गिरावट देखने को मिली। शहर के निवेशकों के पोर्टफोलियो में करीब 1200 करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान है। पिछले दो कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1250 अंकों से ज्यादा लुढ़क चुका है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील एक अगस्त तक हो जाने की उम्मीद कम है। जानकार इसे सितंबर तक होने की संभावना जता रहे हैं।
अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते पर लगातार बयानबाजी करके भारत के साथ असहज स्थिति बना रहे हैं। शुक्रवार को शेयर सेंसेक्स 721.08 अंक गिरकर 81,463.09 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 225.10 अंक गिरकर 24,837 के स्तर पर बंद हुआ। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में तो इससे भी तेज बिकवाली देखने को मिली। कानपुर में लाखों सक्रिय निवेशक हैं जिनमें से बड़ा वर्ग खुदरा निवेशकों का है। इस गिरावट का असर कानपुर के निवेशकों पर भी पड़ा। शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में प्रतिदिन करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। कैश सेगमेंट के मुकाबले वायदा बाजार में कई गुना ज्यादा कारोबार होता है। शेयर मामलों के जानकार और केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह ने बताया कि बाजार गिरावट के कई कारण हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अनिश्चितता बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक की बिकवाली हावी है। चुनिंदा लिस्टेड कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे आए हैं।
उन्होंने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और दुनिया भर के बाजारों से कमजोर संकेत के चलते बाजार लगातार गिर रहा है। उन्होंने बताया कि अस्थिरता बाजार का स्वभाव है। लंबी अवधि में जो निवेशक निवेश कर रहे हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छे गुणवत्ता वाले शेयरों में खरीदारी करने का यह सही समय हो सकता है। यह गिरावट दीर्घकालिक निवेश के लिए एक अच्छा अवसर भी हो सकती है।