मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूनिवर्सिटी, तकनीकी और प्रौद्योगिकी संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग एजेंसी के मानक को गलत करार दिया है।
साथ ही दावा किया है कि भारत के तमाम शैक्षिक संस्थान दुनिया के शीर्ष संस्थानों से श्रेष्ठ हैं, फिर भी दुनिया की टॉप-200 यूनिवर्सिटी की सूची में एक भी भारतीय शैक्षिक संस्थान का नाम नहीं है। अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से रैंकिंग का मानक बदलने और रैंकिंग प्रक्रिया में भारतीयों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
वीएसएसडी पीजी कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में आए मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कोने-कोने में भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट फैले हैं, फिर भी यहां के शैक्षिक संस्थानों को सही रैंकिंग नहीं दी जाती है। दरअसल, रैंकिंग करने वाली दो संस्थाएं अमेरिका की हैं, जिससे 70 हजार लोग जुड़े हैं।
ये सभी अंग्रेजी की पढ़ाई और विदेशी स्टूडेंटों, फैकल्टी के पठन-पाठन को मानक बनाकर मूल्यांकन करते हैं, फिर जुड़े हुए लोग वोट डालते हैं। इसमें भारतीय नहीं हैं। इस सिलसिले में रैंकिंग एजेंसी (बेस्ट वैल्यू यूएस और क्यूएस) के लोगों को बुलाकर पूछा गया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में भारत अंतरराष्ट्रीय मानक सुधारने में जुटा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ही 500 विदेशी शिक्षकों से संपर्क साधा और गेस्ट फैकल्टी के तौर पर बुलाकर आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी और एनआईटी की कक्षाएं लगवाने का फैसला किया। इसका बड़ा लाभ स्टूडेंटों को मिलेगा। वह पढ़ने का नया तरीका सीखेंगे।
इन शिक्षकों को वर्ष 2016 में ही कक्षाएं लेनी हैं। राज्यमंत्री ने कहा कि देश की नई शिक्षा नीति भी बन रही है। अब तक टेलीफोन से 30 हजार सुझाव आ चुके हैं।
इस बार की शिक्षा नीति में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर खास ध्यान दिया गया है। शिक्षा नीति में आरएसएस के दखल पर बोले कि यह आरोप निराधार है। शिक्षा का आदर्श स्वरूप बनाने की कोशिश की जा रही है।
सीएसजेएमयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने से इनकार
मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री ने छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने से इनकार कर दिया है। राज्यमंत्री ने कहा कि कानपुर यूनिवर्सिटी के पास पर्याप्त भूमि नहीं है। बताते चलें राज्यमंत्री ने कानपुर यूनिवर्सिटी से ही स्नातक की पढ़ाई की। पीएचडी भी यहीं से किया है।
एकेडमिक स्टाफ कॉलेज खोलने की मांग
उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी ने राज्यमंत्री को ज्ञापन देकर बताया कि शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए स्टाफ कॉलेज का प्रस्ताव यूजीसी को भेजा गया था, जिसे मंजूरी नहीं मिली है। प्रमोशन, वेतन वृद्धि के एकेडमिक परफारमेंस इंडेक्स (एपीआई) के मानक को समाप्त किया जाए। इस पर राज्यमंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
‘शिक्षा का हुआ बाजारीकरण’
कानपुर। वीएसएसडी पीजी कॉलेज के संस्थापक दिवस समारोह में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण हुआ है। स्टूडेंटों को स्टार्ट अप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया का लाभ उठाना चाहिए।
इस मौके पर राज्यमंत्री से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खोए डिग्री सर्टिफिकेट का पता लगाने की मांग की गई। समारोह के दौरान मंत्री ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदाहरण देकर छात्रों को उत्साहित किया। कहा कि शिक्षा मूल्यों को लेकर चल रहे वीएसएसडी जैसे कॉलेज आदर्श स्वरूप हैं।
इस मौके पर बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा कि ब्रह्मावर्त सनातन धर्म मंडल ने शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया। प्रबंध समिति के सचिव वीरेंद्र जीत सिंह ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी 14 शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
अध्यक्षता कर रहे डॉ. ईश्वरचंद्र गुप्ता ने भी संस्कार परक शिक्षा देने की वकालत की। इस मौके पर एएस वाजपेयी, डॉ. केके गुप्ता, प्रिंसिपल एएस भटनागर, डॉ. सुप्रिया शुक्ला, डॉ. अरविंद दीक्षित, नंदिता सिंह, नीतू सिंह मौजूद रहे।
ट्रेन में दिल्ली तक साथ गए संघ नेता होसबोले
रामशंकर कठेरिया का स्वागत और विदाई भाजपा के भावी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में की गई। जिस समय कठेरिया शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे, उन्हें विदा करने के लिए प्रांतीय संगठन मंत्री सुनील बंसल भी लखनऊ से यहां पहुंचे। ट्रेन के कोच में संघ के सर सह कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी दिल्ली तक गए।
माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर संघ और भाजपा में जो कवायद चल रही है, उसी संबंध में वार्ता करने के लिए कठेरिया और होसबोले एक साथ रवाना हुए।
होसबोले लखनऊ में संघ की बैठक में आए थे। सर्किट हाउस में कठेरिया ने कहा कि यदि संगठन चाहेगा तो वह यूपी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री सुबह साढ़े छह बजे श्रमशक्ति एक्सप्रेस से कानपुर पहुंचे। बारिश और कड़ाके की ठंड के बीच उनका स्वागत करने के लिए भाजपाइयों की भीड़ सेंट्रल स्टेशन पर भी लगी रही।
दलितों का अगुवा साबित करने की कोशिश
केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया ने अपने आप को दलित नेता साबित करने की हर संभव कोशिश की। वीएसएसडी कालेज के स्थापना समारोह के दौरान उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जमकर प्रशंसा की।
साथ यह भी कहना नहीं भूले कि वह भी लंबे समय से दलित समाज की अगुवाई करते आ रहे हैं। कठेरिया यह साबित करने में लगे थे कि दलितों का उत्थान बसपा में नहीं सिर्फ भाजपा में है।
एएमयू पर मांगा माया से जवाब
कानपुर(ब्यूरो)। मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने मंगलवार को यहां बसपा सुप्रीमो मायावती को निशाने पर लिया और कहा कि गरीब दलितों, पिछड़ों का हक लंबे समय से मारा जा रहा है, फिर भी बसपा सुप्रीमो ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और जामिया मिलिया के मामले में कुछ नहीं बोला। उन्हें जवाब देना चाहिए। बताते चलें कि केेंद्र सरकार ने इन संस्थानों को अल्पसंख्यक मानने से इंकार किया है।
मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया मंगलवार को शहर आए और कहा कि बसपा सुप्रीमो ने दलितों का इस्तेमाल किया। साथ ही भाई आनंद को आर्थिक रूप से संपन्न बना डाला। इसका जवाब दलित समुदाय वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मायावती को जरूर देगा। अगले चुनाव में भाजपा को दलितों का अच्छा वोट मिलेगा। राज्यमंत्री ने अखिलेश सरकार को भी घेरा। कहा कि यूपी में जंगलराज कायम है। अब भाजपा नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी सड़कों पर उतरेंगे।
मिशन यूपी का प्रमुख चेहरा बनाए जाने के सवाल का सटीक जवाब भी कठेरिया ने नहीं दिया और कहा कि चुनाव के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। राज्यमंत्री ने भी अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाए जाने की वकालत की लेकिन कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट के आदेश और आपसी सहमति से इस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।