कानपुर। कानपुर समेत देश भर के एयरपोर्ट और स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी देने में एक ही साइबर अपराधी या संगठन का नाम हो सकता है। यह महत्वपूर्ण जानकारी कमिश्नरी पुलिस की साइबर क्राइम टीम को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टूल्स से धमकी देने के संदेश के विश्लेषण करने से हासिल हुई है। इसकी तलाश में टीम जुट गई है। गूगल को ईमेल कर आरोपियों के आईपी एड्रेस की जानकारी ली जा रही है। अहमदाबाद कमिश्नरी पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर की टीमें भी डाटा साझा कर रही हैं।
29 जून को चकेरी समेत देश के 44 एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। यह धमकी एयरपोर्ट अथॉरिटी को ईमेल भेजकर दी गई गई थी। ईमेल मिलते ही एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। 23 जुलाई को शहर के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल आया था। ऐसा ही ईमेल दिल्ली, एनसीआर और अन्य शहरों को भेजा गया था। इस मामले में क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम की टीम जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच ने दोनों ही ईमेल का डेटा एनालिसिस और एआई विशलेषण कराया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक डाटा एनालिसिस में दोनाें ही ईमेल में समानताएं हैं। ऐसे में संभव है कि भेजने वाला एक ही व्यक्ति हो सकता है। उसने गूगल के सर्वर का इस्तेमाल कर ईमेल किए हैं।
गूगल से मांगा गया आईपी एड्रेस
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक गूगल से ईमेल भेजने वाले का आईपी एड्रेस मांगा गया है। गूगल का मुख्य सर्वर कैलिफोर्निया में है जहां से किसी भी ईमेल भेजने वाले की जानकारी मिल सकती है। यह जानकारी दो से तीन दिन में हासिल होने की उम्मीद है।
ईमेल भेजकर डराने की शरारत
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ईमेल भेजने वाले ने डराकर दहशत पैदा करने के लिए ही साजिश रची है। वह इंटरनेट का अच्छा जानकार नहीं है। उसने कई जगह चूक की है। पुलिस के पास अहम जानकारियां आ गई हैं।