कानपुर। पश्चिम एशिया में जारी संकट से प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने रिलीफ योजना शुरू की है। इस आपातकालीन योजना का उद्देश्य निर्यातकों को बीमा, वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करना है। यह योजना फरवरी से जून के बीच किए गए निर्यातों को कवर करेगी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव और फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने बताया कि यह योजना उन निर्यातकों के लिए है जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण माल भेजने में देरी, परिवहन लागत में वृद्धि और बीमा प्रीमियम महंगा होने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसका लक्ष्य निर्यात को जारी रखना और व्यापार पर संकट के असर को कम करना है। योजना के तहत पहले से बीमित निर्यातकों को 100 फीसदी तक जोखिम कवर मिलेगा। नए निर्यातकों को सरकारी सहायता के साथ 95 फीसदी तक जोखिम कवर दिया जाएगा। लॉजिस्टिक्स लागत में राहत के लिए बढ़े हुए फ्रेट और बीमा खर्च का आंशिक भुगतान किया जाएगा। विशेष रूप से छोटे व्यवसाय (एमएसएमई) को इस मद में मदद मिलेगी। यह योजना संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत, इराक, ईरान और इस्राइल जैसे देशों में होने वाले निर्यातों पर लागू होगी।
उन्होंने बताया कि जिन छोटे निर्यातकों के पास वर्तमान में बीमा नहीं है उन्हें योजना के तहत अतिरिक्त लागत का आंशिक मुआवजा मिलेगा। यह एक अस्थायी योजना है जो फरवरी 2026 से जून 2026 के बीच के निर्यातों को कवर करती है। इसका मुख्य उद्देश्य निर्यातकों को आर्थिक नुकसान से बचाना और भारत के निर्यात को बचाए रखना है। प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल सेठ ने बताया कि सरकार का निर्णय वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत सराहनीय है। इससे निर्यातकों को बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और जोखिम से राहत मिलेगी।